सेबी ने ब्रोकरों की परिवर्तनशील शुद्ध संपत्ति की गणना के लिए नया तरीका प्रस्तावित किया

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सेबी ने ब्रोकरों की परिवर्तनशील शुद्ध संपत्ति की गणना के लिए नया तरीका प्रस्तावित किया

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  • Publish Date - April 24, 2026 / 07:21 PM IST,
    Updated On - April 24, 2026 / 07:21 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने शुक्रवार को स्टॉक ब्रोकरों के लिए पूंजी की गणना के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ब्रोकरों के पास उनकी कारोबारी गतिविधियों और जोखिम के हिसाब से पर्याप्त पैसा उपलब्ध रहे।

यह प्रस्ताव उस नई व्यवस्था के बाद आया है, जिसके तहत ब्रोकर ग्राहकों का पैसा सीधे समाशोधन निगम को भेजते हैं। इससे ब्रोकरों के पास बहुत कम ग्राहक फंड बचता है और मौजूदा गणना प्रणाली की उपयोगिता घट गई है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, 2022 में किए गए बदलाव के तहत ब्रोकर के पास पिछले छह महीनों में ग्राहकों का जो औसत नकद शेष रहता है, उसका 10 प्रतिशत जोड़कर उनकी परिवर्तनशील शुद्ध संपत्ति तय की जाती है। ब्रोकरों को आधारभूत शुद्ध पूंजी या परिवर्तनशील शुद्ध संपत्ति में से जो अधिक हो, उसे बनाए रखना होता है।

सेबी ने कहा कि अब ग्राहकों के पैसे की व्यवस्था बदल चुकी है, इसलिए यह पुराना तरीका उतना उपयोगी नहीं रहा और इसमें बदलाव जरूरी है।

नए प्रस्ताव के अनुसार परिवर्तनशील शुद्ध संपत्ति की गणना कई घटकों के आधार पर की जाएगी। इसमें पिछले छह महीनों के औसत ग्राहक उधार शेष का 10 प्रतिशत एक हिस्सा होगा। इसके साथ ही सक्रिय ग्राहकों की संख्या के आधार पर अतिरिक्त पूंजीगत आवश्यकता भी जोड़ी जाएगी।

इसके अतिरिक्त, ब्रोकरों को अपने ग्राहक आधार के अनुसार अपनी कुल शुद्ध संपत्ति में अतिरिक्त वृद्धि बनाए रखनी होगी। प्रत्यक्ष ग्राहकों के मामले में, जिन ब्रोकरों के पास 10,000 से अधिक और 50,000 तक सक्रिय ग्राहक होंगे, उन्हें 50 लाख रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता होगी। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त 50,000 ग्राहकों या उसके आंशिक हिस्से पर 50 लाख रुपये की और आवश्यकता होगी।

सेबी ने इस प्रस्ताव पर 15 मई तक आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं।

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय