सेबी ने म्यूचुअल फंड वर्गीकरण नियम में सुधार किया, ‘लाइफ साइकल फंड’ पेश
सेबी ने म्यूचुअल फंड वर्गीकरण नियम में सुधार किया, ‘लाइफ साइकल फंड’ पेश
नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को म्यूचुअल फंड योजनाओं के वर्गीकरण के लिए एक संशोधित रूपरेखा जारी की। इसके तहत ‘लाइफ साइकल फंड’ को शामिल किया गया है, समाधान उन्मुख योजनाओं की श्रेणी को समाप्त किया गया है और एकरूपता और निवेशक संरक्षण को बढ़ाने के लिए खुलासा मानदंडों को सख्त किया गया है।
यह कदम, योजनाओं के नाम में बढ़ा-चढ़ाकर किए गए रिटर्न दावों पर अंकुश लगाने और ‘नाम के अनुरूप’ स्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सेबी म्यूचुअल फंड के बदलते परिदृश्य और विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में उभरते अवसरों के अनुरूप नियामकीय रूपरेखा बनाने का प्रयास कर रहा है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने परिपत्र में योजनाओं को मोटे तौर पर पांच श्रेणियों… इक्विटी, ऋण (बॉन्ड), हाइब्रिड, लाइफ साइकल और अन्य योजनाएं- फंड ऑफ फंड्स योजनाएं और इंडेक्स फंड या ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) जैसी पैसिव योजनाओं…में वर्गीकृत किया है।
सेबी ने कहा, ‘‘योजना का नाम योजना श्रेणी के अनुरूप होगा। इसका मकसद निवेशकों के लिए योजनाओं की पहचान को आसान बनाना और म्यूचुअल फंड में एक विशेष श्रेणी की योजनाओं के नामों में एकरूपता लाना है।’’
बाजार नियामक ने कहा, ‘‘योजना के नाम में ऐसे शब्दों/वाक्यांशों का प्रयोग नहीं किया जाएगा जो केवल योजना के प्रतिफल पहलू को बताते हों।’’
पेशकश दस्तावेजों और विज्ञापनों में ‘योजना के प्रकार’ के विवरण में सेबी के निर्धारित प्रारूप का सख्ती से पालन करना चाहिए।
चॉइस वेल्थ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निकुंज सर्राफ ने कहा कि सेबी के नए वर्गीकरण नियम खुदरा निवेशकों के लिए लगातार जटिल होते जा रहे इस उद्योग को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘इक्विटी, डेट (बॉन्ड), हाइब्रिड और समाधान-उन्मुख फंड में श्रेणियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके और एक समान परिसंपत्ति आवंटन सीमाएं निर्धारित करके, नियामक यह सुनिश्चित कर रहा है कि योजनाएं वास्तव में अपने दावों को प्रतिबिंबित करें। इससे दोहराव कम होता है, तुलनात्मक स्थिति बेहतर होती है और उत्पाद की स्थिति में आवश्यक पारदर्शिता आती है।’’
परिपत्र के अनुसार, समाधान उन्मुख योजनाओं की श्रेणी को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। इस श्रेणी के अंतर्गत मौजूदा योजनाओं के तहत नए निवेश स्वीकार नहीं किये जाएंगे और सेबी की पूर्व स्वीकृति के अधीन समान परिसंपत्ति आवंटन और जोखिम प्रोफाइल वाली अन्य योजनाओं में इनका विलय हो जाएगा।
समाधान-उन्मुख म्यूचुअल फंड योजना विशेषीकृत, दीर्घकालिक निवेश साधन हैं जो सेवानिवृत्ति या बच्चों की शिक्षा जैसे विशिष्ट लक्ष्यों के लिए तैयार किए गए हैं। इन योजनाओं में अनिवार्य पांच साल की ‘लॉक-इन’ अवधि होती है।
इसके अलावा, सेबी ने कहा कि विदेशी प्रतिभूतियों को अब एक अलग परिसंपत्ति वर्ग के रूप में नहीं माना जाएगा।
साथ ही, नियामक ने पूर्व-निर्धारित परिपक्वता और लक्ष्य-आधारित निवेश के लिए ‘ग्लाइड पाथ’ रणनीति के साथ ओपन-एंडेड योजनाओं के रूप में ‘लाइफ साइकल फंड’ की शुरुआत की है। इसमें इक्विटी, डेट, इनविट (बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट) और गोल्ड/सिल्वर ईटीएफ आदि में निवेश करने की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे योजना परिपक्वता के करीब आती है, इक्विटी में आवंटन निरंतर कम होता जाता है, जबकि बॉन्ड यानी निश्चित आय वाले उत्पादों में आवंटन बढ़ता जाता है।
भाषा रमण अजय
अजय

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