सेबी ने निवेशक की मृत्यु के बाद प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बनाया सरल

सेबी ने निवेशक की मृत्यु के बाद प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बनाया सरल

सेबी ने निवेशक की मृत्यु के बाद प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बनाया सरल
Modified Date: June 19, 2026 / 08:37 pm IST
Published Date: June 19, 2026 8:37 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशक की मृत्यु के बाद प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उपायों को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। इससे नामित व्यक्तियों और कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए वित्तीय परिसंपत्तियों पर दावा करना अधिक आसान और त्वरित हो जाएगा।

सेबी ने अपनी निदेशक मंडल की बैठक में कम मूल्य के दावों के लिए ‘क्विक ट्रांसमिशन प्रोसेसिंग’ (क्यूटीपी) नामक नई श्रेणी शुरू करने तथा सरलीकृत दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दावों की सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी।

बाजार नियामक के निदेशक मंडल ने अपने सदस्यों के लिए नई आचार संहिता तथा हितों के टकराव और खुलासे से जुड़े प्रावधानों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से सेबी (कर्मचारी सेवा) विनियम, 2001 में संशोधनों को भी मंजूरी दी।

यह कदम सेबी द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। समिति ने सेबी के निदेशक मंडल के सदस्यों और कर्मचारियों से जुड़े हितों के टकराव, खुलासे और संबंधित नियमों की व्यापक समीक्षा के बाद यह सिफारिश की थी।

सेबी ने कहा कि अंतिम आचार संहिता और कर्मचारी सेवा विनियमों में संशोधनों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने तथा राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत क्यूटीपी सुविधा भौतिक रूप में रखी गई प्रतिभूतियों के लिए 10,000 रुपये तक तथा डीमैट प्रतिभूतियों के लिए 30,000 रुपये तक के दावों पर उपलब्ध होगी।

इसके अलावा, सरलीकृत दस्तावेजी प्रक्रिया के माध्यम से प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की सीमा भी दोगुनी कर दी गई है। भौतिक प्रतिभूतियों के मामले में प्रति सूचीबद्ध कंपनी सीमा पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि डीमैट प्रतिभूतियों के लिए प्रति लाभार्थी सीमा 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है।

नियामक ने प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए कई अन्य उपायों को भी मंजूरी दी है।

संशोधनों के तहत स्थायी खाता संख्या (पैन) जमा कराने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, क्योंकि डीमैट खाता खोलते समय पैन का विवरण पहले से उपलब्ध होता है।

इसके अलावा, उत्तराधिकार संबंधी कानूनों में हाल के संशोधनों के अनुरूप वसीयत के प्रमाणीकरण की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है।

सेबी ने अलग-अलग शपथपत्र और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की जगह संयुक्त शपथपत्र-सह-अनापत्ति प्रमाणपत्र जमा करने की अनुमति भी दे दी है।

सत्यापन को आसान बनाने के लिए, अब मूल या सत्यापित प्रतियों के अलावा क्यूआर कोड वाले मृत्यु प्रमाणपत्रों की प्रतियां भी स्वीकार की जाएंगी। विदेशी अधिकार क्षेत्रों में जारी किए गए मृत्यु प्रमाणपत्रों के लिए, नियामक ने भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं या भारतीय बैंकों के साथ संपर्क रखने वाले विदेशी बैंकों के माध्यम से अतिरिक्त सत्यापन व्यवस्था निर्धारित की है।

भाषा योगेश रमण

रमण


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