नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने महत्वपूर्ण सूचकांक के निर्धारण के मामले में मंगलवार को एक नई रूपरेखा पेश की। इसके तहत किसी भी सूचकांक को उस समय ‘महत्वपूर्ण सूचकांक’ माना जाएगा, जब उसे ट्रैक करने वाली म्यूचुअल फंड योजनाओं का दैनिक औसत संयुक्त प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) पिछले छह महीनों में लगातार 20,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा हो।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि इस कदम का उद्देश्य सूचकांक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
परिपत्र के मुताबिक, सूचकांक वर्गीकरण की यह सीमा प्रत्येक वर्ष 30 जून और 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली छमाही आधार पर आंकी जाएगी।
नियामक ने स्पष्ट किया कि एक बार किसी सूचकांक को ‘महत्वपूर्ण’ श्रेणी में शामिल कर दिया गया तो वह इसमें बना रहेगा, जब तक कि उसका एयूएम लगातार तीन वर्षों तक निर्धारित सीमा से नीचे नहीं चला जाता।
सेबी ने कहा कि सूचीबद्ध प्रतिभूतियों पर आधारित सूचकांक को तब ‘महत्वपूर्ण सूचकांक’ माना जाएगा जब वह म्यूचुअल फंड योजनाओं में छह महीने की अवधि के दौरान तय एयूएम मानदंड को पूरा करता है।
यह कदम सेबी (सूचकांक प्रदाता) विनियम, 2024 के लागू होने के बाद आया है, जो ऐसे सूचकांक प्रदाताओं पर लागू होते हैं जो महत्वपूर्ण सूचकांक का प्रबंधन करते हैं।
सेबी ने ऐसे सूचकांकों की प्रारंभिक सूची भी जारी की है, जिसमें प्रमुख मानक सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 के साथ निफ्टी 500 और बीएसई 500 जैसे व्यापक सूचकांक शामिल हैं। इसके अलावा एनएसई इंडिसेस लिमिटेड, बीएसई इंडेक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और क्रिसिल के सेक्टोरल, डेट और हाइब्रिड इंडेक्स भी सूची में शामिल हैं।
नए प्रावधान के तहत इन महत्वपूर्ण सूचकांकों के प्रदाताओं को छह महीने के भीतर सेबी में पंजीकरण कराना होगा। हालांकि, आरबीआई द्वारा अधिकृत सूचकांकों पर यह शर्त लागू नहीं होगी।
मौजूदा प्रदाताओं को बदलाव अवधि के दौरान काम जारी रखने की अनुमति होगी, बशर्ते वे तय समय सीमा में आवेदन करें।
सेबी ने यह भी कहा कि पहले से किसी अन्य क्षमता में पंजीकृत और सूचकांक सेवाएं दे रही संस्थाओं को दो वर्षों के भीतर अलग कानूनी इकाई बनानी होगी।
नियामक ने स्पष्ट किया कि शिकायत निवारण प्रणाली केवल सेबी-पंजीकृत प्रदाताओं द्वारा जारी महत्वपूर्ण सूचकांकों पर ही लागू होगा।
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