नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की शुक्रवार को होने वाली बैठक में मुक्त बाजार पुनर्खरीद व्यवस्था को दोबारा शुरू करने, एआईएफ योजनाओं की मंजूरी तेज करने और म्यूचुअल फंड के लिए इंट्राडे उधारी नियमों में ढील जैसे कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
बाजार नियामक सेबी के इन प्रस्तावित कदमों का उद्देश्य पूंजी बाजार की कार्यकुशलता को बढ़ाना है।
बैठक के एजेंडा में एक प्रमुख प्रस्ताव शेयर बाजार के जरिये खुले बाजार में शेयरों की पुनर्खरीद को फिर से शुरू करने का है। इसके साथ ही पुनर्खरीद पूरा करने की समयसीमा घटाकर निर्गम खुलने की तारीख से 66 कार्यदिवस करने का प्रस्ताव है, जबकि पहले यह अवधि छह महीने तक हो सकती थी।
हालांकि, कंपनियों को निर्गम अवधि के पहले आधे हिस्से में कुल निर्धारित राशि का कम-से-कम 40 प्रतिशत उपयोग करने की मौजूदा शर्त बनाए रखने का सुझाव दिया गया है।
यह बैठक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय की अध्यक्षता में होने वाली छठी बोर्ड बैठक होगी। पांडेय ने एक मार्च, 2025 को सेबी प्रमुख का पदभार संभाला था।
इसके अलावा, निदेशक मंडल ‘गरुड़’ नामक हरित-चैनल व्यवस्था के प्रस्ताव पर भी फैसला ले सकता है। इस व्यवस्था के तहत वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) अपना नियोजन प्रस्ताव दाखिल करने के 10 कार्यदिवस के भीतर कोष जुटाना शुरू कर सकेंगे, जबकि अभी इसके लिए 30 दिन का इंतजार करना पड़ता है। इसका मकसद प्रक्रियाओं को सरल बनाना और पैसे जुटाने में तेजी लाना है।
म्यूचुअल फंड के लिए कारोबारी सत्र के दौरान उधारी लेने से संबंधित नियमों में भी ढील देने का प्रस्ताव है। इसके तहत परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को केवल रिडेम्प्शन भुगतान ही नहीं, बल्कि सौदा निपटान, विदेशी मुद्रा देनदारियों, डेरिवेटिव मार्जिन भुगतान और अन्य नकदी प्रबंधन जरूरतों के लिए भी इंट्राडे उधारी लेने की अनुमति दी जा सकती है।
यह प्रस्ताव म्यूचुअल फंड योजनाओं में नकदी आवाजाही के समय में अंतर से उत्पन्न परिचालन चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है। फिलहाल, इंट्राडे उधारी का उपयोग मुख्य रूप से भुगतान और निपटान दायित्वों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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