शिलांग, 19 जून (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि विदेशी सहायता-प्राप्त परियोजनाओं (ईएपी) को केवल वित्तपोषण के साधन के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने, आजीविका को सशक्त बनाने और भौगोलिक चुनौतियों को आर्थिक वृद्धि के अवसरों में बदलने के माध्यम के तौर पर देखना चाहिए।
सीतारमण ने यहां ‘पूर्वोत्तर राज्यों में विदेशी सहायता-प्राप्त परियोजनाओं का लाभ उठाने’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पूर्वोत्तर क्षेत्र में ईएपी के तहत मिलने वाली सहायता में सात गुना बढ़ोतरी हुई है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘वर्ष 2004 से 2014 के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र को लगभग 9,000 करोड़ रुपये की सहायता मिली थी, जो 2014 से 2026 के बीच बढ़कर लगभग 76,000 करोड़ रुपये हो गई है।’’
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के किसान, शिल्पकार और युवा लंबे समय से बाजार तक पहुंच बनाने में मुश्किलों का सामना करते रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने क्षेत्र के विकास के लिए आधारभूत ढांचे और संपर्क सुविधा को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 के बाद से पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 10,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा 5,000 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण कार्य अभी जारी है।’’
सीतारमण ने कहा कि ईएपी केवल वित्तीय संसाधन ही नहीं लातीं, बल्कि परियोजना निर्माण, खरीद प्रक्रिया, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और सामुदायिक भागीदारी से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां भी उपलब्ध कराती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र का 75 से अधिक बार दौरा किया है, जबकि केंद्रीय मंत्रियों ने 700 से अधिक यात्राएं की हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पूर्वोत्तर राज्य को सहायता प्राप्त करने के लिए दिल्ली आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
सीतारमण के री-भोई जिले में एक जैविक मसाला प्रसंस्करण संयंत्र के दौरे का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘मैंने उस प्रकार के हस्तक्षेप को देखा जिसकी पूर्वोत्तर क्षेत्र को अधिक जरूरत है। स्थानीय उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण हो रहा है, किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है और पारंपरिक क्षमताओं को आधुनिक बाजारों से जोड़ा जा रहा है।’’
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने जैविक मसाला प्रसंस्करण संयंत्र को किसानों के नेतृत्व में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया।
भाषा यासिर प्रेम
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