भारत का तेल आयात रणनीति में बदलाव ऊर्जा सुरक्षा के प्रति बड़े बदलाव का संकेत: ग्लोबलडेटा

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भारत का तेल आयात रणनीति में बदलाव ऊर्जा सुरक्षा के प्रति बड़े बदलाव का संकेत: ग्लोबलडेटा

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 10:39 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 10:39 PM IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) कच्चे तेल के आयात को लेकर भारत की रणनीति केवल ‘सस्ता तेल’ खरीदने तक सीमित न रहकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाने तक पहुंच गई है। विश्लेषक फर्म ग्लोबलडेटा ने शुक्रवार को यह बात कही।

विश्लेषक फर्म ने कहा कि भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग एक-चौथाई हिस्सा तेल से पूरा करता है और अपनी जरूरत का 87 प्रतिशत तेल दूसरे देशों से खरीदता है। इसे देखते हुए, भारत अब एक नयी रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन, अलग-अलग देशों से तेल खरीदने और अमेरिका के साथ ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता भारत के बारे में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) का अनुमान है कि इसकी मांग 2024 के 55 लाख बैरल प्रति दिन से बढ़कर 2035 तक 80 लाख बैरल प्रति दिन हो जाएगी। घरेलू स्तर पर तेल खोज जारी रहने के बावजूद 2035 तक आयात पर निर्भरता बढ़कर 92 प्रतिशत हो सकती है, जिससे बाहरी आपूर्ति के झटकों का खतरा बढ़ जाएगा।

ग्लोबलडेटा में आर्थिक शोध के सह परियोजना प्रबंधक अर्णब नाथ ने कहा कि मांग और घरेलू उत्पादन के बीच बढ़ता अंतर आपूर्ति के आधार को व्यापक बनाने के प्रयासों को प्रेरित कर रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक या राजनीतिक रूप से सीमित आपूर्ति गलियारों पर निर्भरता कम करना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल के स्रोतों में 2022 से काफी बदलाव आया है। यूक्रेन संघर्ष से पहले भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 2.7 प्रतिशत थी, जो रियायती दरों के कारण 2024 में बढ़कर 25.9 प्रतिशत हो गई। हालांकि, व्यापारिक नियमों और प्रतिबंधों के कड़े होने के बीच जनवरी 2026 में रूस से आयात में सालाना आधार पर 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।

इसी समय, अमेरिका और वेनेजुएला फिर से भारत के कच्चे तेल के आयात समूह का हिस्सा बने हैं। ग्लोबलडेटा ने कहा कि वेनेजुएला से मात्रा सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन उन्हें एक सामरिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

फर्म ने यह भी कहा कि यह बदलाव ईरान से संबंधित व्यापार पर अमेरिकी शुल्क की धमकियों से भी प्रभावित है।

भाषा सुमित प्रेम

प्रेम