सीतारामन ने प्रधानमंत्री के मितव्ययिता के आह्वान का किया बचाव, आलोचकों पर साधा निशाना
सीतारामन ने प्रधानमंत्री के मितव्ययिता के आह्वान का किया बचाव, आलोचकों पर साधा निशाना
(तस्वीरों के साथ)
मुंबई, 25 मई (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत समेत मितव्ययिता के अन्य उपायों के आह्वान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा… इन तीन मुख्य कारकों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
सीतारमण ने यहां सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) के 37वें स्थापना दिवस समारोह में प्रधानमंत्री की अपील के बाद नकारात्मक और निराशावादी विमर्श गढ़ने वालों पर भी निशाना साधा और और कहा कि इस समय भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह संकट बाहरी घटनाओं के कारण उत्पन्न हुआ है और घरेलू अर्थव्यवस्था सकारात्मक तथा मजबूत बनी हुई है।
सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील के बाद आदतन आलोचना करने वाले लोगों ने एक नकारात्मक और निराशावादी विमर्श गढ़ा है। ऐसी टिप्पणियां तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह (विमर्श) गलत है क्योंकि यह अफवाह के जरिये भय फैला रहा है। भारत भय फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और कार्यों से लोगों को विश्वास दिलाना होगा।’’
सीतारमण ने कहा कि ईंधन की कीमतें ऊंची हैं, सोने दाम भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे बाहरी मोर्चे पर चिंताएं बढ़ गई हैं। उर्वरकों की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री ने मितव्ययिता की अपील की है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, विदेशी मुद्रा के संरक्षण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मौजूदा स्थिति में ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा (तीन एफ) पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।’’
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की नीति को घरेलू वृद्धि को बनाए रखने के लिए सूझ-बूझ के साथ तैयार किया गया है। डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से राजस्व पर एक लाख करोड़ रुपये का असर होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद कुछ आलोचक इस बहस में कूद पड़े हैं। वे दावा कर रहे हैं सब कुछ ‘बिखर’ रहा है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने जीएसटी (माल एवं सेवा कर) संग्रह और वाहन बिक्री सहित अर्थव्यवस्था में तेजी दर्शाने वाले कई संकेतकों का जिक्र किया।
सीतारमण ने कहा, ‘‘हमें यह समझना चाहिए कि चुनौतियां बाहरी कारकों से अधिक प्रभावित हैं। हमें यह भी स्वीकार करना चाहिए कि भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति आज भी सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 81 लाख करोड़ रुपये के लंबित भुगतानों का मुद्दा उनकी कार्यशील पूंजी और विकास को प्रभावित कर रहा है।
वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से आग्रह किया कि वे एमएसएमई को भुगतान करने के लिए 45 दिन की समय सीमा से अधिक समय न लें।
इसके साथ, सीतारमण ने बैंकों से मानक ऋण उत्पादों से आगे बढ़कर ऐसे कर्ज विकल्प विकसित करने का आग्रह किया जिनकी अदायगी संबंधित कारोबार की जरूरतों एवं आय चक्र के अनुरूप हो।
उन्होंने कहा, ‘‘सिडबी और प्रत्येक बैंकों के लिए मेरा संदेश है कि गैर-मानक कारोबार के लिए एक ही तरह के ऋण उत्पाद उपयुक्त नहीं हो सकते हैं।’’
वित्त मंत्री ने कहा, “मानक ऋण उत्पाद गैर-मानक कारोबार के लिए काम नहीं कर सकते।”
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न व्यवसायों की आय अलग-अलग समय और तरीके से होती है, जबकि अभी कर्ज की अदायगी आम तौर पर मासिक आधार पर तय होती है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘कृषि से जुड़े उद्यमों की आय हर महीने नहीं होती, पर्यटन क्षेत्र में कमाई कुछ महीनों में केंद्रित रहती है, जबकि निर्यातकों को भुगतान में समय लगता है…। ऐसे में सभी के लिए एक समान पुनर्भुगतान संरचना रखना उचित नहीं है।’’
उन्होंने सिडबी से यह सुनिश्चित करने के लिए पहल करने को कहा कि ऋण को उद्यम के व्यावसायिक चक्र के अनुरूप बनाया जाए।
सीतारमण ने सिडबी से केवल ऋणदाता के बजाय छोटे उद्यमों के लिए ‘बाजार निर्माता’ एवं जोखिम-साझेदार की भूमिका निभाने और स्टार्टअप कंपनियों की ऋण पूंजी जरूरतों को पूरा करने को भी कहा।
उन्होंने कहा कि 32 करोड़ भारतीय एमएसएमई में कार्यरत हैं। ऐसे में एमएसएमई का समर्थन करने से अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है
सीतारमण ने कहा, ‘‘यदि हम एमएसएमई ऋण को सही ढंग से प्रबंधित करते हैं, तो हम मध्यम वर्ग को सही ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं। यदि हम मध्यम वर्ग को सही ढंग से प्रबंधित करते हैं, तो हम विकसित भारत को सही ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं। यह इतना सीधा संबंध है…।’’
भाषा रमण अजय
अजय

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