नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने डिजिटल उत्पादों की इलेक्ट्रॉनिक आवाजाही (ई-ट्रांसमिशन) पर सीमा शुल्क लगाने पर लगी रोक को खत्म करने की मांग की है। मंच का कहना है कि यह रोक आत्मनिर्भरता के प्रयासों को कमजोर कर रही है, राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है और कृत्रिम मेधा (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर कर लगाने की देश की क्षमता को सीमित कर रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एसजेएम ने इस रोक को खत्म करने की मांग मार्च के अंतिम सप्ताह में होने वाली विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की 14वीं मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले की है। इस बैठक में ई-कॉमर्स पर लगी इस रोक को बढ़ाने पर फैसला किए जाने की उम्मीद है।
डिजिटल उत्पादों की इलेक्ट्रॉनिक आवाजाही का अर्थ सॉफ्टवेयर, संगीत, वीडियो या ई-बुक्स जैसे उत्पादों की ऑनलाइन आपूर्ति से है।
एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने कहा कि डिजिटल आयात पर शुल्क मुक्त व्यवस्था घरेलू उत्पादन को हतोत्साहित करके ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को कमजोर कर रही है।
उन्होंने एक बयान में कहा, ”हमारे स्टार्टअप और सॉफ्टवेयर कंपनियां विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने में सक्षम हैं। वे घरेलू स्तर पर फिल्में और अन्य मनोरंजन उत्पाद बना सकते हैं, लेकिन यदि ऐसे सभी उत्पादों का बिना किसी बाधा और बिना शुल्क के आयात किया जाता है, तो उन्हें स्वदेशी रूप से बनाने के लिए प्रोत्साहन कम हो जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, ”ई-उत्पादों पर शुल्क की यह रोक वास्तव में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के हमारे प्रयासों को खत्म कर रही है, जिससे अमेरिका, यूरोपीय देशों और चीन को फायदा हो रहा है।”
महाजन ने कहा कि यह रोक नए जमाने के डिजिटल क्षेत्रों, विशेष रूप से एआई पर कर लगाने की भारत की क्षमता को भी कम कर रही है, और इससे अमेरिका तथा चीन के एकाधिकार को और बढ़ावा मिल सकता है।
महाजन ने कहा, ”भविष्य में जीडीपी में एआई की हिस्सेदारी बहुत बड़ी होगी। इलेक्ट्रॉनिक आवाजाही पर सीमा शुल्क की रोक से राजस्व का भारी नुकसान होगा और इससे अमेरिका तथा चीन के एकाधिकार को और बढ़ावा मिल सकता है।”
उन्होंने कहा, ”यह मुद्दा अब केवल पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक आवाजाही तक सीमित नहीं रह गया है। एआई एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है और यदि एआई उत्पादों को बिना किसी सीमा शुल्क के भारत में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है, तो हम इन सेवाओं पर कर लगाने और उनके प्रभाव को विनियमित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर खो देंगे।”
महाजन ने चेतावनी दी कि इसके रोजगार और नीति-निर्माण पर भी गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हम इलेक्ट्रॉनिक आवाजाही के माध्यम से डिजिटल उत्पादों को बिना सीमा शुल्क के भारतीय क्षेत्र में आने देते हैं, तो यह घरेलू उद्यमों, विशेष रूप से स्टार्टअप को प्रभावित करेगा।
भाषा पाण्डेय रमण
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