शिमला, 20 मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर 2025-26 में 8.3 प्रतिशत रही। बाजार मूल्य पर वृद्धि दर 10.1 प्रतिशत रही। भारी वित्तीय संकट और प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान के बावजूद राज्य ने यह वृद्धि दर हासिल की है।
राज्य की वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष में 6.4 प्रतिशत थी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा शुक्रवार को विधानसभा में पेश की गई 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, मौजूदा कीमतों पर जीएसडीपी 2,30,587 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष 2,09,385 करोड़ रुपये था।
राज्य की प्रति व्यक्ति आय (पीसीआई) 2024-25 के 2,58,196 रुपये से 9.8 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 में 2,83,626 रुपये हो गई है, जो 2,19,575 रुपये के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
सेवा क्षेत्र का दबदबा कायम है और 8.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ इसने राज्य के सकल मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में 46.3 प्रतिशत का योगदान दिया। इसके बाद द्वितीयक क्षेत्र (39.4 प्रतिशत) और प्राथमिक क्षेत्र (14.3 प्रतिशत) का स्थान रहा।
कृषि और संबद्ध क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई, जो 2021-22 के 22,428 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 32,415 करोड़ रुपये हो गया।
औद्योगिक क्षेत्र का योगदान स्थिर कीमतों पर 2,66,324 करोड़ रुपये (39.96 प्रतिशत) अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
विनिर्माण क्षेत्र ने जीएसवीए में 25.32 प्रतिशत का योगदान दिया, जबकि निर्माण क्षेत्र का हिस्सा 8.42 प्रतिशत और बिजली, जलापूर्ति व अन्य उपयोगिताओं का योगदान 6.22 प्रतिशत रहा।
सेवा क्षेत्र से प्राप्त जीएसवीए 2025-26 में 2,62,581 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें पर्यटन क्षेत्र की 7.77 प्रतिशत की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
समीक्षा के अनुसार, पर्यटन में जबरदस्त उछाल आया है। घरेलू पर्यटकों की संख्या 2020 के 32.13 लाख से बढ़कर 2025 में 311.47 लाख (धार्मिक पर्यटन सहित) हो गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में राज्य के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए ‘पर्यावरण-अनुकूल’ पर्यटन अपनाने पर जोर दिया गया है।
सरकार को दिसंबर 2025 तक 143 जलबिजली परियोजनाओं से 1,668 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। मार्च 2026 तक 249 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय की उम्मीद है।
राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) की 28 परियोजनाओं ने दिसंबर 2025 तक 197.36 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जिसके वित्त वर्ष के अंत तक 220 करोड़ इकाई से अधिक होने की संभावना है।
भाषा सुमित रमण
रमण
रमण