धागे की कीमतों में उछाल से सूरत की बुनाई इकाइयों ने स्वैच्छिक रूप से दो दिन छुट्टी शुरू की
धागे की कीमतों में उछाल से सूरत की बुनाई इकाइयों ने स्वैच्छिक रूप से दो दिन छुट्टी शुरू की
सूरत, 23 अगस्त (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के बीच पॉलिएस्टर धागे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से कपड़ा निर्माण की लागत बढ़ने और कारोबार लाभहीन होने के कारण सूरत की कपड़ा इकाइयों ने स्वैच्छिक रूप से उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है। उद्योग प्रतिनिधियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उद्योग प्रतिनिधियों ने रविवार को बताया कि कुछ इकाइयां सप्ताह में दो दिन तक छुट्टी रख रही हैं।
फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एफओजीडब्ल्यूए) के पूर्व उपाध्यक्ष और बमरौली वीवर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विष्णुभाई पटेल ने कहा कि शहर के बुनाई क्षेत्र की करीब 1.5 लाख पावरलूम इकाइयों ने उत्पादन में कटौती की है।
उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख कपड़ा केंद्रों में शामिल सूरत में सात से आठ लाख बुनाई इकाइयां हैं, जो आमतौर पर अलग-अलग पालियों में चौबीसों घंटे चलती हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, इस क्षेत्र में एक लाख से अधिक लोग काम करते हैं और उत्पादन में कटौती से 40,000-50,000 श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं।
पटेल ने ‘ पीटीआई- भाषा’ को बताया, ‘हाल के महीनों में धागे और अन्य कच्चे माल की कीमत में काफी वृद्धि हुई है। हमने ऊंचे दामों पर धागे खरीदे, लेकिन तैयार ‘ग्रे फैब्रिक’ (बिना रंगा हुआ कपड़ा) के लिए हमें उसके अनुरूप कीमत नहीं मिल रही है, क्योंकि व्यापारी भी इसे बाजार में ऊंचे दामों पर नहीं बेच पा रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि पॉलिएस्टर धागे की कीमत करीब 112 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, यानी इसमें करीब 25-30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे उत्पादन की लागत का पूरा गणित बिगड़ गया है।
पटेल ने कहा, ‘‘हमारे ‘ग्रे फैब्रिक’ की लागत पहले करीब 16 रुपये प्रति मीटर थी। धागे की कीमत में इतनी वृद्धि के बाद इसकी कीमत करीब पांच रुपये बढ़नी चाहिए थी, लेकिन बाजार में केवल एक से 1.50 रुपये तक की वृद्धि ही स्वीकार की गई है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद धागा निर्माताओं ने अपनी कीमतों में कच्चे माल की लागत में हुई वास्तविक वृद्धि से 20-25 प्रतिशत अधिक बढ़ोतरी की है।
उन्होंने कहा कि धागा निर्माताओं ने कीमतें बढ़ाने के लिए कोई गठजोड़ किया है या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन धागे की कीमतों में वृद्धि कच्चे माल की लागत में हुई वृद्धि के मुकाबले काफी अधिक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में बुनकर संगठनों ने तय किया कि कीमतें स्थिर होने तक धागे की खरीद और खपत कम करने के लिए उत्पादन घटाना ही एकमात्र रास्ता है।
पटेल ने कहा, ‘‘किसी को इकाई बंद करने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है। यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और प्रत्येक इकाई की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ इकाइयां सप्ताह में दो दिन छुट्टी रख रही हैं, जबकि कुछ ने एक पाली कम कर दी है। मैंने भी अपनी इकाई में एक पाली कम कर दी है।’’
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय

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