सोया खली निर्यात जून में 69 प्रतिशत घटकर 30,000 टन पर सिमटा
सोया खली निर्यात जून में 69 प्रतिशत घटकर 30,000 टन पर सिमटा
इंदौर (मध्यप्रदेश), 13 जुलाई (भाषा) ऊंची कीमतों और प्रमुख आयातक बाजारों में कमजोर मांग के बीच भारत का सोया खली निर्यात जून के दौरान करीब 69 प्रतिशत घटकर 30,000 टन रह गया।
प्रसंस्करणकर्ताओं के इंदौर स्थित संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने सोमवार को जारी अनुमान में यह जानकारी दी।
सोपा के आंकड़ों के अनुसार, जून, 2025 में देश से 97,000 टन सोया खली का निर्यात किया गया था।
सोपा का अनुमान है कि जून में देश में 5.52 लाख टन सोया खली का उत्पादन हुआ। इस अवधि में 75,000 टन सोया खली की मानवीय उपभोग और पांच लाख टन पशु, पॉल्ट्री और मछली आहार में खपत हुई, जबकि महीने के अंत में पुराने स्टॉक समेत इसका कुल भंडार 1.27 लाख टन रहा।
सोपा के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने कहा कि भारतीय सोया खली के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लंबे समय से अधिक बने हुए हैं जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है।
पाठक ने कहा कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और कुछ प्रमुख बाजारों में मांग कमजोर रहने का असर भी भारतीय निर्यात पर पड़ा है।
सोपा के अनुमान के अनुसार, चालू तेल विपणन वर्ष (अक्टूबर 2025-सितंबर 2026) के शुरुआती नौ महीनों के दौरान सोया खली का कुल निर्यात करीब नौ लाख टन रहा, जबकि पिछले तेल विपणन वर्ष की समान अवधि में यह 15.60 लाख टन था।
प्रसंस्करण कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला उत्पाद सोया खली कहलाता है। यह प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही पशु आहार तथा मुर्गियों एवं मछलियों का दाना भी तैयार किया जाता है।
भाषा हर्ष
रवि कांत अजय
अजय

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