नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) इस्पात क्षमता संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना अब उद्योग की तत्कालिक प्राथमिकता है। उद्योग जगत के एक अधिकारी ने बुधवार को यह बात कही।
सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की कुल स्थापित इस्पात विनिर्माण क्षमता को बढ़ाकर 30 करोड़ टन (एमटी) करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक विनय वर्मा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ भारत वर्ष 2030 तक इस्पात विनिर्माण क्षमता को बढ़ाकर 30 करोड़ टन करने के अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना उद्योग की तत्कालिक प्राथमिकता बन गया है।’’
उन्होंने कहा कि इस्पात निर्माण के लिए कबाड़ (स्क्रैप) सबसे टिकाऊ कच्चे माल में से एक है, लेकिन भारत में अब भी इसकी कमी है।
वर्मा ने कहा कि घरेलू मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को पाटने के लिए भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 70-80 लाख टन लौह कबाड़ का आयात किया।
उन्होंने कहा कि हालांकि वाहन पुनर्चक्रण, बुनियादी ढांचे को हटाने और औद्योगिक विनिर्माण से घरेलू स्तर पर कबाड़ की उपलब्धता बढ़ने के कारण लौह कबाड़ का आयात सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत घट गया है।
वर्मा ने कहा कि केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ही एमजंक्शन के मंच पर कबाड़ लेनदेन की कुल मात्रा 25 लाख टन रही।
टाटा स्टील और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का संयुक्त उद्यम एमजंक्शन भारत की सबसे बड़ी बी2बी (व्यवसाय से व्यवसाय) ई-कॉमर्स कंपनी है।
भाषा निहारिका अजय
अजय