(E20 Fuel Controversy/ Image Credit: Hyundai)
नई दिल्ली: E20 Fuel Controversy: देश में E20 पेट्रोल को धीरे-धीरे अब सामान्य ईंधन के रूप में लागू किया जा रहा है। इस पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। हालांकि, E20 पेट्रोल को लेकर कई कार मालिकों और नई कार खरीदने की योजना बना रहे लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह हर कार के लिए सुरक्षित है आर भविष्य में यदि E25 या E30 जैसे ज्यादा एथेनॉल वाले फ्यूल आए तो मौजूदा वाहनों पर उसका क्या असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अधिक चिंता उन लोगों को हो सकती है जिनकी कारें वर्ष 2023 से पहले बनी हैं। उस समय अधिकांश पेट्रोल कारों को E20 फ्यूल को ध्यान में रखकर डिजाइन नहीं किया गया था। हालांकि, कुछ कंपनियों ने पहले ही ऐसे इंजन तैयार किए थे जो अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए हर पुरानी कार के लिए स्थिति एक जैसी नहीं है। यदि आपकी कार पुरानी है तो घबराने की जरूरत नहीं बल्कि सबसे पहले अपनी कार निर्माता कंपनी की सलाह और वाहन की यूजर मैनुअल जरूर देखें। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि आपकी कार E20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है या नहीं।
नई कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है। भारत में अब लगभग सभी नई पेट्रोल कारों को E20 पेट्रोल के अनुसार तैयार किया जा रहा है। यानी इन वाहनों में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने पर किसी तरह की तकनीकी परेशानी आने की संभावना बहुत कम है। फिर भी एक बात पर ध्यान देना जरूरी है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इसी कारण कुछ मामलों में कार का माइलेज पहले से थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि यह अंतर हर कार और उसकी ड्राइविंग स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
वहीं, अब लोगों के मन में यह सवाल भी है कि क्या भारत आने वाले वर्षों में E25 या E30 पेट्रोल की ओर बढ़ेगा। ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि E20 तक की व्यवस्था के लिए नई कारें तैयार हैं। लेकिन इससे अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में बड़े बदलाव करने होंगे। सामान्य पेट्रोल कारों को बिना तकनीकी बदलाव के ऐसे ईंधन पर चलाना आसान नहीं होगा। यदि भविष्य में ऐसा फैसला लिया जाता है तो वाहन कंपनियों को नई तकनीक अपनानी पड़ेगी और पुराने वाहनों के मालिकों को भी कंपनी के निर्देशों का पालन करना होगा।
आने वाले समय में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इन कारों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे अलग-अलग प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर आसानी से चल सकें। इनके इंजन और फ्यूल सिस्टम सामान्य पेट्रोल कारों से अलग होते हैं। फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि नई कारें इसके लिए तैयार हैं और E25 या E30 जैसे ईंधन को लागू होने में अभी समय लग सकता है। ऐसे में सबसे बेहतर तरीका यही है कि अपनी कार निर्माता कंपनी की सलाह के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल करें।