एमएसएमई वित्तपोषण के लिए ‘इनवाइस डिस्काउंट’ व्यवस्था अपनाने पर हो अध्ययन: बिक्र्स व्यापार मंत्री

Ads

एमएसएमई वित्तपोषण के लिए 'इनवाइस डिस्काउंट’ व्यवस्था अपनाने पर हो अध्ययन: बिक्र्स व्यापार मंत्री

  •  
  • Publish Date - August 7, 2026 / 10:39 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 10:39 PM IST

नयी दिल्ली/ जयपुर, सात अगस्त (भाषा) ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापार वित्त तक आसान पहुंच देने के लिए ‘इनवॉइस डिस्काउंट व्यवस्था’ की स्थापना को लेकर अध्ययन करने पर सहमति जताई है।

यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक स्तर पर एमएसएमई के लिए वित्त का अंतर लगभग 5.7 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है, जो असंगठित उद्यमों को शामिल करने पर आठ लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाता है।

सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने माना कि छोटे उद्यमों के सामने मुख्य समस्या व्यवहार्य व्यापार योजनाएं पेश न कर पाने की है, जिससे कड़े ऋण नियम, ऊंची ब्याज दरें, अधिक गारंटी की मांग और बाजार तक पहुंच में बाधाएं पैदा होती हैं।

बैठक में इस वित्तीय अंतर को कम करने और गिरवी-आधारित ऋण प्रणाली से हटकर समावेशी और विकास-उन्मुख ऋण व्यवस्था की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई गई। साथ ही, विनिमय दर जोखिम कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण के विकल्प तलाशने पर भी जोर दिया गया।

ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की 16वीं बैठक के बाद जारी ‘जयपुर सहमति’ में कहा गया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्यापार से जुड़े प्राप्त होने वाली बकाया राशि के आधार पर वित्त उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे एमएसएमई अपनी प्राप्तियों को तुरंत नकदी में बदलकर कार्यशील पूंजी जुटा सकेंगे।

इस व्यवस्था में एमएसएमई, बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान, बड़ी कंपनियां, बीमा और नियामक एजेंसियों की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई सहित कई देशों के मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हुए।

बयान के अनुसार, दस्तावेज में शामिल सभी बिंदुओं पर ब्रिक्स सदस्य देशों की सहमति है और जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण