Suger Price Hike: महंगाई की मार! एक बार फिर बढ़ी शक्कर की कीमत, अब एक किलो के लिए देने होंगे इतने रुपए

महंगाई की मार! एक बार फिर बढ़ी शक्कर की कीमत, अब एक किलो के लिए देने होंगे इतने रुपए, Sugar prices hiked by one rupee again

Suger Price Hike: महंगाई की मार! एक बार फिर बढ़ी शक्कर की कीमत, अब एक किलो के लिए देने होंगे इतने रुपए
Modified Date: August 26, 2026 / 08:55 pm IST
Published Date: August 26, 2026 7:45 pm IST

नई दिल्ली: Sugar Prices Hiked Again त्योहारी मौसम की मांग बढ़ने के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन खुदरा बाज़ार में चीनी की कीमतें एक रुपये प्रति किलो से ज्यादा बढ़ गईं। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देने के फैसले के बाद मिल-गेट कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद, चीनी की खुदरा कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं।

Sugar Prices Hiked Again उपभोक्ता मामलों के विभाग (मूल्य निगरानी प्रभाग) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी की अखिल भारतीय औसत दर 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि मंगलवार को यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम थी। चीनी की मौजूदा औसत कीमत एक महीने पहले के 48.68 रुपये प्रति किलो से 34 प्रतिशत अधिक है, जबकि यह दर एक साल पहले के स्तर से 41 प्रतिशत अधिक है, जब चीनी 46.27 रुपये प्रति किलो पर उपलब्ध थी। आंकड़ों से पता चलता है कि बुधवार को अधिकतम बिक्री मूल्य 76 रुपये प्रति किलो था, जबकि ‘मॉडल दर’ 65 रुपये प्रति किलो थी।

सरकार और चीनी उद्योग निकायों ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों में मिल पर कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, खुदरा स्तर पर इसका असर अभी दिखना बाकी है। आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को चीनी की थोक कीमत भी मामूली रूप से बढ़कर 60.36 रुपये प्रति किलो हो गई। एक महीने पहले औसत थोक दर 45.34 रुपये प्रति किलो और एक साल पहले 43.02 रुपये प्रति किलो थी। इस सप्ताह की शुरुआत में, खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा था कि आयात की अनुमति देने और चीनी की सट्टेबाजी व जमाखोरी पर रोक लगाने के सरकार के फैसले के बाद से चीनी की मिल पर कीमत 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपये प्रति किलो रह गई है।

पिछले सप्ताह चीनी की मिल पर कीमतें रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं। चोपड़ा ने इस बढ़ोतरी का कारण मिलों द्वारा कीमतें ‘बढ़ाना’ बताया था। चोपड़ा ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘चीनी की मिल कीमतें, जिन्हें मिलों ने बढ़ा दिया था, अब कम होने लगी हैं। ये घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं और आने वाले दिनों में और कम होंगी।’’ कीमतों को काबू में रखने के लिए, केंद्र सरकार ने हाल ही में 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। भारतीय चीनी एवं जैव-उर्जा विनिर्माता संघ (इस्मा) के अनुसार, विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का कुल चीनी उत्पादन (एथनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी को हटाने के बाद) लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती स्टॉक 50 लाख टन का था। देश में सालाना घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने से पहले देश ने आठ लाख टन चीनी का निर्यात किया था। इस्मा ने सितंबर के आखिर में पहले का बचा स्टॉक 35 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है। संघ ने बताया कि मौजूदा विपणन वर्ष में कुल 309 लाख टन चीनी उत्पादन में से 30 लाख टन चीनी का इस्तेमाल दूसरे कामों (जैसे एथनॉल बनाने) के लिए किए जाने का अनुमान है। इस्मा ने शुरू में अनुमान लगाया था कि विपणन वर्ष 2025-26 में देश का कुल चीनी उत्पादन 345 लाख टन होगा, लेकिन बाद में खराब मौसम और कीटों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित होने से इस अनुमान को घटा दिया गया।


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।