चालू सत्र में फरवरी तक चीनी का उत्पादन 12.43 प्रतिशत बढ़कर 2.47 करोड़ टन पर

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चालू सत्र में फरवरी तक चीनी का उत्पादन 12.43 प्रतिशत बढ़कर 2.47 करोड़ टन पर

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  • Publish Date - March 2, 2026 / 06:46 PM IST,
    Updated On - March 2, 2026 / 06:46 PM IST

नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) अक्टूबर में शुरू हुए चालू विपणन सत्र में फरवरी माह तक भारत का चीनी उत्पादन दो करोड़ 47.5 लाख टन तक पहुंच गया, जो कि महाराष्ट्र और कर्नाटक से अधिक उत्पादन के कारण पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 12.43 प्रतिशत अधिक है। उद्योग निकाय इस्मा ने सोमवार को यह जानकारी दी।

विपणन वर्ष 2024-25 (अक्टूबर-सितंबर) की समान अवधि में चीनी उत्पादन 2.2 करोड़ टन रहा था।

भारतीय चीनी एवं जैव-ईंधन विनिर्माता संघ (इस्मा) ने बयान में कहा कि देश के शीर्ष चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में उत्पादन चालू विपणन वर्ष में फरवरी तक बढ़कर 95.3 लाख टन हो गया, जो एक साल पहले 75 लाख टन था।

देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 73 लाख टन से मामूली बढ़कर 74.8 लाख टन हो गया, जबकि देश के तीसरे सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कर्नाटक का उत्पादन उक्त अवधि में 38.2 लाख टन से बढ़कर 44.5 लाख टन हो गया।

मौजूदा समय में कुल 305 कारखाने चालू हैं, जबकि पिछले साल इसी समय 330 मिलें चल रही थीं।

इस्मा ने कहा कि दक्षिण कर्नाटक में कुछ मिलों के जून/जुलाई से सितंबर, 2026 तक विशेष सत्र के दौरान परिचालन फिर से शुरू करने की उम्मीद है। इस्मा ने कहा कि उद्योग न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द बढ़ोतरी का इंतजार कर रहा है।

उत्पादन लागत बढ़ने और पूर्व-मिल प्राप्तियों में कमी के कारण, मिलों को नकदी-प्रवाह दबाव में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे गन्ना भुगतान बकाया बढ़ गया है।

महाराष्ट्र में 15 फरवरी तक बकाया 4,601 करोड़ रुपये था, जो पिछले साल की इसी तारीख के 2,744 करोड़ रुपये से अधिक है।

इस्मा ने कहा, ‘‘वर्तमान लागत संरचनाओं के अनुरूप समय पर एमएसपी संशोधन, मिल लाभप्रदता को बहाल करने, किसानों के भुगतान में तेजी लाने और सरकार पर किसी भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना बाजार स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।’’

अपने तीसरे अनुमान में, इस्मा ने वर्ष 2025-26 के लिए सकल चीनी उत्पादन 3.24 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के दो करोड़ 96.2 लाख टन के वास्तविक उत्पादन से अधिक है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय