नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) परिधान निर्यातकों के संगठन एईपीसी ने सोमवार को कहा कि उसने नागर विमानन मंत्रालय को पत्र लिखकर पश्चिम एशिया संकट की वजह से उड़ान में व्यवधान के कारण निर्यात कार्गो पर विलंब शुल्क माफ करने की मांग की है।
कार्गो टर्मिनल ऑपरेटर्स (सीटीओ) की मौजूदा शुल्क संरचना के तहत, विलंब शुल्क तब लागू होता है जब कार्गो निर्धारित मुक्त अवधि के बाद टर्मिनल सुविधाओं में रहता है।
हालांकि, एईपीसी ने तर्क दिया कि वर्तमान परिस्थितियां वैश्विक हवाई लॉजिस्टिक्स श्रृंखला में एक असाधारण और अपरिहार्य व्यवधान पैदा करती हैं।
परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में विलंब शुल्क लगाने से उन निर्यातकों पर अनुचित वित्तीय बोझ पड़ेगा जो पहले से ही निर्यात खेप में देरी, अनुबंध संबंधी अनिश्चितताओं और बाजार से संबंधित चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।’
शक्तिवेल ने यह भी सुझाव दिया कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) निर्यात खेपों पर विलंब शुल्क की छूट देने के लिए सीटीओ को उपयुक्त निर्देश जारी करने पर विचार करे, जिन्हें उड़ान व्यवधान, हवाई क्षेत्र प्रतिबंध, या जारी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से उत्पन्न संबंधित परिचालन बाधाओं के कारण उठाया नहीं जा सका है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के हस्तक्षेप से निर्यातक समुदाय को बहुत जरूरी राहत मिलेगी और इस चुनौतीपूर्ण चरण के दौरान भारत के एयर कार्गो व्यापार में विश्वास और निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
शक्तिवेल ने कहा कि अप्रत्याशित घटनाक्रम ने भारतीय हवाई अड्डों से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक निर्यात कार्गो की समय पर आवाजाही को सीधे प्रभावित किया है।
उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘परिणामस्वरूप, निर्यात खेप वर्तमान में भारत भर में कई हवाई अड्डों के कार्गो टर्मिनल पर फंसी हुई है। देरी पूरी तरह से बाहरी और अप्रत्याशित कारकों के लिए जिम्मेदार है।’’
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