नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) दिल्ली-एनसीआर और मुंबई के वाणिज्यिक रियल एस्टेट बाजार में पिछले साल नए कार्यस्थलों की आपूर्ति में उल्लेखनीय गिरावट आई जबकि घरेलू एवं विदेशी कंपनियों की ओर से प्रीमियम कार्यस्थलों की मांग मजबूत बनी रही। कोलियर्स इंडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
रियल एस्टेट सलाहकार कोलियर्स के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में वर्ष 2025 के दौरान नए कार्यस्थलों की आपूर्ति 15 प्रतिशत घटकर 74 लाख वर्ग फुट रह गई, जो वर्ष 2024 में 87 लाख वर्ग फुट थी।
वहीं, मुंबई में कार्यस्थलों की नई आपूर्ति में 37 प्रतिशत की तेज गिरावट आई और यह 83 लाख वर्ग फुट से घटकर 52 लाख वर्ग फुट रह गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में देश के सात प्रमुख शहरों- बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और कोलकाता में कार्यालय स्थल की मांग नई आपूर्ति से अधिक रही। इसके चलते बाजार में खाली पड़े कार्यालय क्षेत्र के अनुपात में कमी आई।
प्रौद्योगिकी कंपनियां और बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा क्षेत्र की तरफ से बीते साल कार्यस्थल की बढ़िया मांग आई। इसके अलावा, भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने की इच्छुक विदेशी कंपनियों ने भी प्रीमियम कार्यस्थलों की मांग को बढ़ावा दिया।
हैदराबाद में कार्यस्थलों की नई आपूर्ति 21 प्रतिशत घटकर 1.08 करोड़ वर्ग फुट रह गई, जबकि कोलकाता में यह 80 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ एक लाख वर्ग फुट पर सिमट गई।
इसके विपरीत, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे में नई आपूर्ति में सुधार देखा गया। बेंगलुरु में कार्यस्थल आपूर्ति 15 प्रतिशत बढ़कर 1.75 करोड़ वर्ग फुट रही। चेन्नई में यह दोगुने से अधिक होकर 45 लाख वर्ग फुट और पुणे में 1.1 करोड़ वर्ग फुट हो गई।
कुल मिलाकर, सातों प्रमुख शहरों में नई कार्यस्थल आपूर्ति पांच प्रतिशत बढ़कर 5.65 करोड़ वर्ग फुट रही, जबकि पट्टा या किराये पर लिया गया क्षेत्र छह प्रतिशत बढ़कर 7.15 करोड़ वर्ग फुट हो गया।
कोलियर्स ने कहा कि मांग आपूर्ति से अधिक रहने के कारण औसत किराये में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत तक की मजबूती दर्ज की गई।
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