नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली स्पाइसजेट एयरलाइन और उसके चेयरमैन अजय सिंह की याचिका खारिज कर दी। याचिका में उच्च न्यायालय के 144.5 करोड़ रुपये जमा कराने के आदेश को चुनौती दी गयी थी।
यह विवाद कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ मध्यस्थता मामले से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने उच्च न्यायालय का 19 जनवरी का आदेश बरकरार रखा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अजय सिंह पर ‘अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी जारी रखने’ के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनवरी में कहा था कि शीर्ष अदालत के 2023 के भुगतान एवं अनुपालन निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया। स्पाइसजेट ने 194.51 करोड़ रुपये देय होने को स्वीकार किया था। इसमें से 50 करोड़ रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं, जबकि 144.51 करोड़ रुपये बाकी हैं।
उच्चतम न्यायालय के फैसले पर स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा कि उसने आदेश को ध्यान में ले लिया है और अदालत के सभी निर्देशों का पालन करेगी।
इसके साथ ही स्पाइसजेट ने कहा कि इस घटनाक्रम का उसके दैनिक परिचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह मामला 2015 के शेयर हस्तांतरण समझौते से जुड़ा है, जिसके तहत मारन और केएएल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी अजय सिंह को बेची थी।
एयरलाइन ने कहा कि वह मारन और केएएल एयरवेज को अब तक 730 करोड़ रुपये चुका चुकी है, जिसमें 580 करोड़ रुपये मूलधन और 150 करोड़ रुपये ब्याज शामिल हैं। शेष राशि अदालत के निर्देश के अनुरूप जमा कराई जाएगी।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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