बासमती चावल की बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए जापान के साथ बातचीत करेंगे : गोयल

बासमती चावल की बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए जापान के साथ बातचीत करेंगे : गोयल

बासमती चावल की बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए जापान के साथ बातचीत करेंगे : गोयल
Modified Date: August 27, 2026 / 07:02 pm IST
Published Date: August 27, 2026 7:02 pm IST

ओसाका, 27 अगस्त (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत व्यापार समझौते की समीक्षा के दौरान जापान के साथ बासमती चावल के लिए ज्यादा बाजार पहुंच का मुद्दा उठाएगा और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात के मौकों पर भी विचार करेगा।

जापान को बासमती चावल का निर्यात बढ़ाने के बारे में उद्योग के एक प्रतिनिधि के सवाल का जवाब देते हुए गोयल ने कहा कि सरकार को जापानी अधिकारियों के साथ बातचीत करनी होगी क्योंकि जापान में चावल एक संवेदनशील क्षेत्र है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार में हमें इस पर काम करना होगा और जापानी सरकार से बात करनी होगी। कई ऐसे क्षेत्र हैं जो हर देश के लिए संवेदनशील होते हैं, और मेरी जानकारी के मुताबिक, जापान में चावल एक संवेदनशील क्षेत्र है।’’

उन्होंने बताया कि जापान में चावल के आयात की मात्रा पर पाबंदियां हैं और तय मात्रा से ज्यादा आयात करने पर शुल्क लगता है।

गोयल ने कहा, ‘‘जब हम सीईपीए (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते) की समीक्षा करेंगे, तो हम जापानी सरकार से बात करेंगे और देखेंगे कि आपसी सहयोग के और कौन से क्षेत्र हो सकते हैं… और खाद्य क्षेत्र में भी।’’

उन्होंने कहा कि प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े मौके देते हैं, बशर्ते वे जापान के गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को पूरा करें।

उन्होंने कहा, ‘‘अच्छे प्रसंस्कृत खाद्य से बहुत सारे मौके मिलते हैं। (भारतीय निर्यातकों को) मानकों को पूरा करना होगा और निर्यात करना होगा।’’

भारत अपने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को ज्यादा कीमत वाले बाजार में फैलाने और विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।

मंत्री ने कहा कि सीईपीए की समीक्षा से ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का मौका मिल सकता है जहां दोनों देश बाजार पहुंच और सहयोग बढ़ा सकते हैं।

गोयल ने यह भी कहा कि नया भारत विनिर्माण को बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है, और यह सिर्फ ‘असेंबलिंग’ पर ही नहीं, बल्कि विनिर्माण के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत पिछले तीन साल से हर वर्ष बुनियादी ढांचा बनाने के लिए 130 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है और आने वाले कई वर्षों तक यह सिलसिला जारी रहेगा।

गोयल ने कहा कि जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संकेत दिया है कि जापान, जापानी विकास और उद्योग को सहारा देने के लिए आर्थिक गतिविधियों के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग भूमिकाओं में 3,00,000 भारतीयों का स्वागत करेगा।

मंत्री ने 27 अगस्त को जापान की अपनी चार दिन की यात्रा पूरी की।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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