एसएंडपी ने भारत की रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘ट्रिपल बी’ पर कायम रखा
एसएंडपी ने भारत की रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘ट्रिपल बी’ पर कायम रखा
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को भारत की संप्रभु साख रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी’ पर बरकरार रखा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत गतिशील एवं तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और यहां नीतिगत पूर्वानुमेयता बनी हुई है।
एसएंडपी ने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और कृषि क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है, लेकिन आर्थिक बुनियाद मजबूत रहने और अगले दो-तीन वर्षों में तेज वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि भारत की रेटिंग को गतिशील एवं तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत बाह्य क्षेत्र और स्थिर संस्थानों का सहारा है, जिससे नीतियां अनुमान लगाने योग्य बनी रहती हैं।
एसएंडपी ने भारत की दीर्घकालिक रेटिंग को ‘बीबीबी’ और अल्पकालिक ‘ए-2’ रेटिंग का बरकरार रखा। वहीं, दीर्घकालिक रेटिंग का परिदृश्य स्थिर है।
हालांकि, ‘बीबीबी’ रेटिंग निवेश श्रेणी की सबसे निचली रेटिंग है। एसएंडपी ने कहा कि सरकार की कमजोर राजकोषीय स्थिति, कर्ज का ऊंचा बोझ और प्रति व्यक्ति कम सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) रेटिंग पर दबाव डालते हैं।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि स्थिर परिदृश्य इस धारणा को दर्शाता है कि नीतिगत स्थिरता और बुनियादी ढांचे में उच्च निवेश भारत की दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाओं को समर्थन देंगे। अगले 24 महीनों में वृद्धि का परिदृश्य तथा स्थिर राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियां सरकार के ऊंचे कर्ज और ब्याज बोझ को सीमित करने में मदद करेंगी।
एजेंसी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान भारत की औसत सालाना आर्थिक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रही, जिससे वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।
एसएंडपी ने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह जाएगी। इसका कारण मौजूदा ऊर्जा संकट और कृषि क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां हैं। हालांकि, अगले तीन वर्षों में भारत की जीडीपी वृद्धि औसतन सात प्रतिशत वार्षिक रहने का अनुमान है।’’
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इससे व्यापक राजकोषीय घाटे के बावजूद जीडीपी के मुकाबले सरकारी कर्ज के अनुपात में बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिलती है।
इस महीने की शुरुआत में एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच ने भी मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए भारत की रेटिंग को ‘बीबीबी-माइनस’ पर बरकरार रखा था।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय

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