टाटा संस में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बोर्ड की मंजूरी, टाटा ट्रस्ट ने अमान्य बताया
टाटा संस में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बोर्ड की मंजूरी, टाटा ट्रस्ट ने अमान्य बताया
मुंबई, 17 सितंबर (भाषा) टाटा संस में साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के 10 साल बाद सबसे गंभीर बोर्डरूम संकट बृहस्पतिवार को सामने आया। निदेशक मंडल ने कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का फैसला किया जबकि टाटा ट्रस्ट ने इस प्रस्ताव को ‘कानूनी रूप से अमान्य’ बताते हुए खारिज कर दिया।
निदेशक मंडल की करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद मतदान की वैधता को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए। टाटा ट्रस्ट ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का हवाला दिया। इसके साथ टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने या निजी कंपनी बने रहने का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में आ गया है।
चंद्रशेखरन ने पिछले महीने बोर्ड से कहा था कि वह 20 फरवरी, 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक और कार्यकाल नहीं चाहते। उनका यह फैसला उनके कार्यकाल के विस्तार पर सर्वसम्मति नहीं बन पाने के बाद आया था।
हालांकि, टाटा संस के प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण वापस करने के आवेदन को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा पिछले हफ्ते खारिज किए जाने के बाद स्थिति बदल गई। इससे कंपनी की संभावित सूचीबद्धता का मुद्दा फिर सामने आया और नेतृत्व में निरंतरता को लेकर दबाव बढ़ा।
टाटा संस ने बयान में कहा कि चंद्रशेखरन ने ‘बोर्ड के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई’ और इसके बाद बोर्ड ने बहुमत से उन्हें पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया। चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसके खिलाफ मतदान किया।
टाटा संस के बोर्ड ने कहा कि वह आरबीआई के लागू दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए कदम उठाएगा और इस संबंध में नियामक तथा टाटा ट्रस्ट के साथ विचार-विमर्श करेगा।
टाटा ट्रस्ट ने इस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी के गठन के नियमों के अनुरूप चेयरमैन की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव के लिए ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का समर्थन जरूरी है। ट्रस्ट के अनुसार, नोएल टाटा के विरोध में मतदान करने से यह प्रस्ताव ‘कानूनी रूप से अमान्य और आधारहीन’ हो गया।
टाटा संस में संबद्ध ट्रस्टों के साथ करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले ट्रस्ट ने कहा कि नोएल टाटा ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय भी बोर्ड के समक्ष रखी थी, लेकिन निदेशक मंडल ने उस पर ध्यान नहीं दिया।
नोएल टाटा ने निदेशकों को दिए बयान में कहा कि मतदान के जरिये चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले, ट्रस्ट द्वारा उस फैसले की स्वीकृति और उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया को पलटने की कोशिश की गई है।
उन्होंने कहा कि आम बैठक में कोरम पूरा नहीं होने के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी थी और ऐसे में निदेशक के रूप में उनकी अपनी स्थिति ‘फिलहाल अनिश्चित’ है। इस स्थिति में लिया गया कोई भी फैसला गंभीर कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।
सूचीबद्धता के मुद्दे पर ट्रस्ट ने एक अलग बयान में कहा कि आरबीआई के 11 सितंबर के फैसले पर बैठक में चर्चा हुई और केवल सूचीबद्धता ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों की तत्काल समीक्षा की जानी चाहिए। ट्रस्ट ने कहा कि समीक्षा के बाद इस मुद्दे पर बोर्ड की एक अलग बैठक होगी।
ट्रस्ट ने कहा कि टाटा संस के बोर्ड ने मार्च, 2024 में कंपनी को सूचीबद्ध नहीं करने का सर्वसम्मत फैसला किया था। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने जुलाई, 2025 में भी इस संबंध में अलग-अलग सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किए थे।
नोएल टाटा ने कहा कि टाटा संस की स्वामित्व संरचना, जिसमें परमार्थ ट्रस्ट बहुलांश शेयरधारक हैं, समूह को लाभांश आय के जरिये अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और शोध कार्यों को समर्थन देने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि बाजार सूचीबद्धता इस स्वरूप को नुकसान पहुंचाएगी।
आरबीआई ने 2022 में टाटा संस को ‘अपर लेयर’ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत तीन साल के भीतर सूचीबद्ध होना था। यह समयसीमा सितंबर, 2025 में समाप्त हो गई। कंपनी ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाने के बाद अपना पंजीकरण वापस करने का आवेदन किया था, जिसे आरबीआई ने खारिज कर दिया।
बृहस्पतिवार का मतदान सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए शुरू की गई प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। संभावित उम्मीदवारों में टाटा स्टील के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) टी वी नरेंद्रन, टाटा संस के मुख्य वित्त अधिकारी सौरभ अग्रवाल और एनएसई के सीईओ आशीष कुमार चौहान के नाम शामिल थे।
मौजूदा टकराव से ट्रस्टों के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने अपने नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन को सूचीबद्धता के खिलाफ मतदान करने को कहा, लेकिन उन्होंने निदेशक के रूप में अपने स्वतंत्र दायित्वों का हवाला देते हुए मना कर दिया।
यह विवाद 2016 में टाटा संस के बोर्डरूम में छिड़े संघर्ष की भी याद दिलाता है। उस समय रतन टाटा और ट्रस्टों के समर्थन से साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया गया था। इसके बाद वर्षों तक कानूनी लड़ाई चली और 2021 में उच्चतम न्यायालय ने ट्रस्टों के अधिकार को बरकरार रखा।
उस विवाद में प्रमुख अल्पांश शेयरधारक शापूरजी पालोनजी समूह था, जिसके पास टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। समूह अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने के लिए कंपनी की सूचीबद्धता की मांग करता रहा है। समूह ने टाटा संस के समक्ष 25,000 करोड़ रुपये की सकल राशि जुटाने के लिए पर्याप्त शेयर खरीदने का प्रस्ताव भी रखा है।
नोएल टाटा ने धन जुटाने के लिए टाटा संस के आंतरिक नकदी प्रवाह, सूचीबद्ध निवेशों की बिक्री, नए कारोबारों में निवेशकों को शामिल करने और परिचालन कंपनियों की संभावित सूचीबद्धता से जुड़ी बिक्री पेशकश समेत विकल्पों पर विचार करने को कहा है।
चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं। वह साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद अंतरिम चेयरमैन बने रतन टाटा के बाद इस पद पर आए थे और 2022 में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किए गए थे।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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