सूचीबद्धता, उत्तराधिकार के मुद्दे पर टाटा संस के निदेशक मंडल की आगामी बैठक पर टिकी निगाहें
सूचीबद्धता, उत्तराधिकार के मुद्दे पर टाटा संस के निदेशक मंडल की आगामी बैठक पर टिकी निगाहें
मुंबई, 15 सितंबर (भाषा) मुंबई में 17 सितंबर को निर्धारित टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बैठक में तीन अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साथ चर्चा हो सकती है – भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया फैसले के बाद शेयर बाजार में सूचीबद्धता की संभावना, एन चंद्रशेखरन के बाद नए चेयरमैन के नाम का फैसला और दो प्रमुख टाटा ट्रस्ट में से एक में बना प्रशासनिक गतिरोध।
नमक से लेकर सॉफ्टवेयर और वाहन तक बनाने वाले इस विशाल औद्योगिक समूह की होल्डिंग कंपनी ने अपना गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का पंजीकरण वापस करने के लिए आवेदन किया था, जिसे पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक ने खारिज कर दिया।
टाटा संस ने अपने बही-खाते को मजबूत करने के लिए 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाने सहित कई कदम उठाने के बाद मार्च, 2024 में यह आवेदन दाखिल किया था, ताकि वह उस नियामकीय ढांचे से बाहर निकल सके, जिसके तहत उसे शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होना पड़ेगा।
मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि इस फैसले ने टाटा समूह के भीतर के समीकरणों को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार को होने वाली बोर्ड बैठक में यह मुद्दा चर्चा में आ सकता है।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस की किसी भी संभावित सूचीबद्धता का स्पष्ट विरोध किया है। खबरों के अनुसार, उन्होंने इस साल फरवरी में टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के नवीनीकरण का समर्थन करने के लिए इसे अपनी पूर्व-शर्तों में से एक के रूप में रखा था। इस बारे में उन्हें टाटा समूह के कुछ अनुभवी पूर्व कर्मचारियों का भी समर्थन मिला है।
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की सामूहिक रूप से लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पालोनजी समूह के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आरबीआई के इस कदम के बाद सूचीबद्धता का विवाद काफी हद तक व्यावहारिक रूप से अप्रासंगिक हो गया है, जब तक कि ट्रस्ट नियामक के इस फैसले को कानूनी चुनौती नहीं देते।
एक निवेश बैंकर ने कहा, ‘‘किसी संभावित आईपीओ के लिए बोर्ड को चेयरमैन सहित प्रबंधन टीम की निरंतरता पर विचार करना होगा। एक बार कंपनी सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ती है, तो संभावित निवेशक भी इस पर स्थिरता और आश्वासन की उम्मीद करेंगे।’’
यह भी अटकलें हैं कि नामांकन समिति चंद्रशेखरन से तीसरे कार्यकाल पर अपने रुख पर पुनर्विचार करने का अनुरोध कर सकती है।
भाषा अजय पाण्डेय
अजय

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