(Textile Export Scheme/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: Textile Export Scheme: सरकार टेक्सटाइल सेक्टर के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली RoSCTL यानी ‘रिबेट ऑफ स्टेट एंड सेंट्रल टैक्सेज एंड लेवीज’ योजना (Textile Export Scheme) की अवधि 30 सितंबर के बाद बढ़ा सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया की टेक्सटाइल इंडस्ट्री इस योजना को पांच साल और जारी रखने की मांग कर रही है। लेकिन इस पर अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय के Department of Expenditure (DoE) को लेना है।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने केवल योजना (Textile Export Scheme) की अवधि बढ़ाने की मांग नहीं की है, बल्कि इसके बजट में भी बढ़ोतरी की अपील की है। अधिकारी ने कहा, उद्योग की ओर से DoE से मौजूदा वित्त वर्ष के लिए तय 5,000 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर दोगुना करने का अनुरोध किया गया है। उद्योग का मानना है कि लंबे समय तक योजना जारी रहने से एक्सपोर्ट कारोबार को स्थिरता मिलेगी और कंपनियां बेहतर तरीके से अपनी योजनाएं बना सकेंगी।
RoSCTL के तहत सरकार कपड़े, गारमेंट्स और दूसरे टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट पर लगने वाले कुछ राज्य और केंद्रीय टैक्स की भरपाई करती है। कई ऐसे टैक्स होते हैं जो सामान्य GST रिफंड में शामिल नहीं होते। इस योजना के जरिए बिजली, पेट्रोल-डीजल पर VAT, मंडी टैक्स, स्टांप ड्यूटी और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ टैक्स का रिफंड दिया जाता है। इससे निर्यातकों की लागत कम करने में मदद मिलती है।
योजना की अवधि बढ़ने पर टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को कारोबार में ज्यादा (Textile Export Scheme) निश्चितता मिल सकती है। टैक्स और लेवी का रिफंड मिलने से उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद रहती है। इससे भारतीय कंपनियां चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के निर्यातकों के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं। साथ ही निर्यातकों के पास कामकाजी पूंजी बेहतर रह सकती है और वे विदेशी खरीदारों के साथ लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट करने में आसानी महसूस कर सकते हैं।
RoSCTL की अवधि बढ़ने का सीधा असर घरेलू बाजार में कपड़ों की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि योजना मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले टेक्सटाइल उत्पादों से जुड़ी है। इसलिए दीवाली और छठ के दौरान भारत में ग्राहकों को कपड़े सस्ते मिलने की गारंटी इस योजना से नहीं है। इसका संभावित फायदा अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों जैसे विदेशी बाजारों में भारतीय टेक्सटाइल खरीदने वाले ग्राहकों को मिल सकता है। FY27 के बजट के संशोधित अनुमान के अनुसार, सरकार ने FY26 में RoSCTL पर करीब 10,010 करोड़ रुपये खर्च किए थे।