देश का चालू खाते का घाटा जुलाई में दोगुने से अधिक होकर सात अरब डॉलर पर

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देश का चालू खाते का घाटा जुलाई में दोगुने से अधिक होकर सात अरब डॉलर पर

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  • Publish Date - September 15, 2026 / 06:39 PM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 06:39 PM IST

मुंबई, 15 सितंबर (भाषा) देश का चालू खाते का घाटा (कैड) जुलाई में बढ़कर सात अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 3.2 अरब डॉलर था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मंगलवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

देश के भुगतान संतुलन (बीओपी) की स्थिति पर जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, चालू खाते का घाटा मुख्य रूप से व्यापारिक वस्तुओं के घाटे में वृद्धि के कारण बढ़ा है।

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, व्यापारिक वस्तुओं का घाटा जुलाई में बढ़कर 31.7 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले इसी महीने में 28.2 अरब डॉलर था। वस्तुओं का आयात 65.6 अरब डॉलर से बढ़कर 76.8 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 37.4 अरब डॉलर से बढ़कर 45.1 अरब डॉलर रहा।

हालांकि, शुद्ध सेवा अधिशेष में सुधार हुआ और यह एक साल पहले के 16.4 अरब डॉलर से बढ़कर 17.6 अरब डॉलर हो गया। जुलाई, 2026 में सेवा निर्यात 38.3 अरब डॉलर और आयात 20.6 अरब डॉलर रहा।

आलोच्य अवधि में शुद्ध अंतरण बढ़कर 13.2 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 12.6 अरब डॉलर था। वहीं, शुद्ध आय का बहिर्वाह चार अरब डॉलर से बढ़कर 6.1 अरब डॉलर हो गया।

जुलाई, 2026 में पूंजी खाते में 27.7 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ, जो एक साल पहले के 3.5 अरब डॉलर से काफी अधिक है।

आरबीआई के अनुसार, जुलाई में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का शुद्ध प्रवाह बढ़कर 7.3 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 4.5 अरब डॉलर था। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का शुद्ध प्रवाह जुलाई में 4.1 अरब डॉलर रहा, जबकि जुलाई, 2025 में इसमें 2.5 अरब डॉलर की निकासी हुई थी।

जुलाई में समग्र भुगतान संतुलन 20.8 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा, जबकि एक साल पहले के समान माह में यह 30 करोड़ डॉलर डॉलर था।

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में चालू खाते का घाटा 11.2 अरब डॉलर रहा, जो 2025-26 की समान अवधि में 6.6 अरब डॉलर था। इस दौरान पूंजी खाते में 23.9 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ, जबकि एक साल पहले यह 11.4 अरब डॉलर था।

अप्रैल-जुलाई अवधि में समग्र भुगतान संतुलन 12.7 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा, जबकि एक साल पहले यह 4.8 अरब डॉलर था।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय