उप्र रेरा का वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त रुख

उप्र रेरा का वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त रुख

उप्र रेरा का वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त रुख
Modified Date: June 27, 2026 / 11:21 pm IST
Published Date: June 27, 2026 11:21 pm IST

लखनऊ / गौतमबुद्ध नगर (उप्र), 27 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण ने वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करने वाले कुछ रियल एस्टेट प्रमोटरों के खिलाफ गंभीर रुख अपनाया है।

उप्र-रेरा ने ऐसे 76 प्रोजेक्ट चिन्हित किए हैं, जिनके प्रमोटरों ने अभी तक अपनी वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा के वेब पोर्टल पर अपलोड नहीं की है।

एक बयान के मुताबिक रियल एस्टेट प्रमोटरों के लिए यह अनिवार्य है कि वे हर वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद अपने प्रोजेक्ट खातों का ऑडिट कराएं और छह महीने के भीतर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट उप्र-रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करें, ताकि उप्र-रेरा परियोजनाओं की समीक्षा और मूल्यांकन कर सके तथा आम जनता और संबंधित परियोजनाओं के आवंटियों को भी सही जानकारी उपलब्ध हो सके।

वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर संबंधित वर्ष के लिए 25,000 रुपये की विलंब शुल्क देना होगा । वहीं, रेरा अधिनियम की धारा-4 और संबंधित नियमों एवं विनियमों के उल्लंघन पर परियोजना की अनुमानित लागत का पांच प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

उप्र-रेरा के नियमों के अनुसार परियोजना खातों का वित्तीय ऑडिट प्रमोटर द्वारा नियुक्त बाहरी ऑडिटर से कराया जाना आवश्यक है। ऑडिटर एक स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए और वह प्रमोटर की कंपनी, समूह या उससे जुड़ी किसी संस्था का ऑडिटर नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य परियोजनाओं की वित्तीय जानकारी में पारदर्शिता, स्वतंत्र जांच और सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना है।

बयान के मुताबिक परियोजनाओं की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर दाखिल नहीं करना गंभीर लापरवाही है। यह रेरा अधिनियम के उन प्रावधानों के विपरीत है, जिनका उद्देश्य प्रमोटरों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उप्र-रेरा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित प्रमोटरों को निर्देश दिए हैं कि वे 15 दिनों के भीतर निर्धारित विलंब शुल्क के साथ वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य रूप से अपलोड करें। ऐसा नहीं करने पर प्राधिकरण द्वारा परियोजना की अनुमानित लागत का पांच प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इस संबंध में सभी उल्लंघनकर्ता प्रमोटरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं।

उप्र-रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा, ‘वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा करना प्रत्येक प्रमोटर की रेरा के तहत मूल जिम्मेदारी है। स्वतंत्र ऑडिट और सही रिपोर्टिंग से पारदर्शिता बढ़ती है और घर खरीदारों का विश्वास मजबूत होता है।’’

उन्होंने कहा,‘‘ उप्र रेरा इन प्रावधानों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करता रहेगा, ताकि आवंटियों के हित सुरक्षित रहें और प्रदेश का रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद तरीके से आगे बढ़े।’

भाषा जफर राजकुमार

राजकुमार


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