(सागर कुलकर्णी)
वॉशिंगटन, 12 जून (भाषा) अमेरिका की भुगतान सुविधा ‘ज़ेल’ भारत में अपनी सेवाओं का विस्तार के साथ ही विदेशी बाजार में प्रवेश करेगी।
कंपनी ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा कि भारत में सेवाओं के इस वर्ष के अंत से पहले शुरू होने की उम्मीद है।
‘ज़ेल’ भुगतान सेवा भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के समान है।
दोनों के बीच एक प्रमुख अंतर यह है कि जहां यूपीआई का विकास नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने किया है और यह मोबाइल ऐप के जरिये लेनदेन की सुविधा देता है, वहीं ‘ज़ेल’ सहभागी बैंकों के मोबाइल ऐप में एकीकृत होता है।
ज़ेल नेटवर्क का संचालन करने वाली अर्ली वार्निंग सर्विसेज एलएलसी अमेरिका के सात प्रमुख वित्तीय संस्थानों- बैंक ऑफ अमेरिका, कैपिटल वन, जेपीमॉर्गन चेस, पीएनसी बैंक, ट्रुइस्ट, यूएस बैंक और वेल्स फार्गो के स्वामित्व में है।
कंपनी ने कहा, ‘‘ दुनिया में सबसे अधिक धन प्रेषण प्राप्त करने वाले देश के रूप में भारत एक स्वाभाविक शुरुआत है। साथ ही उन लाखों अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है जो नियमित रूप से यहां पैसा भेजते हैं।’’
कंपनी ने ‘ज़ेल यूएसडी’ नामक अपनी अमेरिकी डॉलर समर्थित स्थिर मुद्रा भी पेश की।
अर्ली वार्निंग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कैमरन फाउलर ने कहा, ‘‘ ‘ज़ेल’, अमेरिका में सबसे बड़े और परिवर्तनकारी भुगतान नेटवर्क में से एक बन गया है क्योंकि यह तेज, नवाचारी एवं भरोसेमंद भुगतान की उपभोक्ता मांग को पूरा करता है। हम मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय भुगतान भी इसी तरह के मोड़ पर हैं और हम इस मांग को पूरा करने के लिए विस्तार कर रहे हैं।’’
अमेरिकी उपभोक्ताओं एवं छोटे व्यवसायों ने ‘ज़ेल’ के माध्यम से 2025 में 1.2 लाख करोड़ डॉलर से अधिक का लेनदेन किया।
यूपीआई वेबसाइट के अनुसार, मंच पर 720 बैंक सक्रिय हैं और मई में 23 अरब से अधिक लेनदेन के जरिये 29.9 लाख करोड़ रुपये (313 अरब डॉलर) से अधिक का हस्तांतरण हुआ।
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