नागपुर, 12 जून (भाषा) उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) विस्फोटक विनिर्माण प्रक्रियाओं में स्वचालन की दिशा में बढ़ने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि कामकाज को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
डीपीआईआईटी की संयुक्त सचिव डॉ. काजल ने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत इस विभाग ने सुरक्षा को मजबूत करने और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय सुधार किए हैं।
नागपुर में ‘पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (पीईएसओ) द्वारा किए गए सुधारों पर जागरूकता कार्यशाला’ के दौरान ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि डीपीआईआईटी विस्फोटक विनिर्माण कारखानों में आकस्मिक विस्फोट रोकने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है।
हाल ही में नागपुर में विस्फोटक इकाइयों में हुए हादसों के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि डीपीआईआईटी और पीईएसओ दोनों भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
जिले के काटोल तहसील स्थित एसबीएल एनर्जी की ‘डेटोनेटर असेम्बली यूनिट’ में मार्च में हुए विस्फोट में कम से कम 19 श्रमिकों की मौत हो गई थी और 23 घायल हुए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि दोनों पक्ष लाइसेंसधारी और नियामक संयुक्त रूप से काम करें। लाइसेंस जारी करते समय सुरक्षा मानकों, भवन और अन्य पहलुओं की जांच की जाती है। वहीं संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का भी दोनों पक्षों को मिलकर पालन करना होगा।’’
उन्होंने कहा कि विस्फोटक कारखानों के अपने नियम और एसओपी होते हैं, जबकि विभाग को निरीक्षण, नियमों के प्रवर्तन एवं अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है।
अधिकारी ने बताया कि डीपीआईआईटी पीईएसओ में अधिकारियों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रहा है और हाल ही में अतिरिक्त पद स्वीकृत किए गए हैं, जिन पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देंगे ताकि लोग एसओपी को बेहतर ढंग से लागू कर सकें। हम कार्यशालाएं आयोजित करेंगे, ताकि इकाइयां नियमों एवं प्रक्रियाओं से अवगत रहें और उनका पालन करें।’’
अधिकारी ने कहा कि 2025 में सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया गया और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘‘ सरकार महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में स्वचालन लाने और नियमों को कड़ा बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। हम किसी के कारोबार को बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन नियमों का पालन जरूरी है।’’
उन्होंने कहा कि जोखिम भरे क्षेत्रों में यह देखा जाएगा कि किन प्रक्रियाओं को स्वचालित किया जा सकता है, ताकि संचालन अधिक सुरक्षित हो सके।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक सकल एफडीआई प्रवाह दर्ज किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह दर्शाता है कि निवेशकों का भारत के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक है और डीपीआईआईटी देश को निवेश के लिए और आकर्षक बनाने के प्रयास कर रहा है।’’
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वर्ष एफडीआई प्रवाह 100 अरब डॉलर के पार जा सकता है।
प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के तहत 56 उद्योगों में 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी गई है, जिनमें 51 प्रतिशत से अधिक छोटे व मझोले शहरों से हैं।
इस पहल से 23.36 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं और भारत के नवाचार तंत्र को मजबूती मिली है।
औद्योगिक अवसंरचना विकास को गति देने के लिए डीपीआईआईटी ने ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ के तहत 33,660 करोड़ रुपये के परिव्यय से 100 निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा है।
भाषा निहारिका मनीषा
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