नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) अमेरिका अगर भारत से आने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क और बढ़ाता है, तो इससे देश का निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। हालांकि इससे निर्यातकों को अपने विदेशी बाजारों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों ने यह राय जताई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जानते हैं कि भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण वह नाराज हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बहुत जल्द भारत पर शुल्क बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों ने आगे कहा कि जैसे-जैसे शुल्क का खतरा गहरा रहा है, भारत को रूसी तेल के मुद्दे पर एक स्पष्ट निर्णय लेना होगा। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने सोमवार को कहा कि मई और नवंबर 2025 के बीच अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में पहले ही 20.7 प्रतिशत की गिरावट आई है और अगर शुल्क आगे भी बढ़ा तो यह गिरावट तेज हो सकती है।
संस्था ने बताया कि भारतीय वस्तुओं को पहले ही 50 प्रतिशत के भारी शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें से 25 प्रतिशत सीधा रूसी कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि चीन के विपरीत भारत के पास अमेरिका पर कोई रणनीतिक बढ़त नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन अमेरिका ने परिणामों के डर से उसे नजरअंदाज कर दिया है।
भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को दोगुना कर दिया है, लेकिन अमेरिका इसे नजरअंदाज कर देगा।
निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो ने भी कहा कि मौजूदा 50 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त कोई भी वृद्धि भारतीय निर्यात को बुरी तरह प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से निर्यात के पारंपरिक क्षेत्रों में ऐसा होगा।
फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि लेकिन ये शुल्क तेजी से विविधीकरण और जोखिम कम करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। इस तरह के दबाव निर्यातकों को एक ही बाजार पर अत्यधिक निर्भरता कम करने, वैकल्पिक गंतव्यों की तलाश करने और उत्पादों एवं प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
भाषा पाण्डेय रमण
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