केंद्रीय उद्यमों के लिए एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान के लिए टीआरईडीएस का इस्तेमाल अनिवार्य
केंद्रीय उद्यमों के लिए एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान के लिए टीआरईडीएस का इस्तेमाल अनिवार्य
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) सरकार ने कार्यरत सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए अपने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम आपूर्तिकर्ताओं के साथ लेनदेन के निपटान के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य एमएसएमई इकाइयों को भुगतान मिलने में होने वाली देरी को खत्म करना है।
सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने 30 जून, 2026 को जारी अधिसूचना के जरिये केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा को लागू कर दिया है।
टीआरईडीएस भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित एक इलेक्ट्रॉनिक मंच है, जो 2017 से काम कर रहा है। इसके माध्यम से एमएसएमई के बकाया व्यापारिक बिलों का वित्तपोषण और छूट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसमें कॉरपोरेट खरीदारों, सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों से मिलने वाले भुगतान के लिए कई वित्तीय संस्थान प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये वित्त उपलब्ध कराते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम सहायता मंच पर 8.70 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीकृत हैं, जो 38 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
हालांकि, भुगतान में देरी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनी हुई है। इससे एमएसएमई की कार्यशील पूंजी फंस जाती है और उनकी वृद्धि पर असर पड़ता है।
मंत्रालय ने कहा कि की ओर से एमएसएमई से की जाने वाली सभी खरीद के लिए टीआरईडीएस को भुगतान का माध्यम बनाने से सार्वजनिक क्षेत्र की खरीद व्यवस्था छोटे आपूर्तिकर्ताओं के हित में काम करेगी। इसके तहत सीपीएसई की खरीद से जुड़े बिल टीआरईडीएस पर दर्ज होंगे और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के जरिये बिलों के वित्तपोषण से एमएसएमई को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा, ‘टीआरईडीएस के माध्यम से सीपीएसई के प्रत्येक बिल के आने से एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं को स्वीकृत बिलों को भुगतान की तय तारीख से पहले ही नकदी में बदलने का विकल्प मिलेगा।’
भाषा
योगेश रमण
रमण

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