महाराष्ट्र के जल जीवन मिशन में योजना संबंधी खामियां, उपलब्धि बढ़ा-चढ़ाकर पेश: कैग रिपोर्ट

महाराष्ट्र के जल जीवन मिशन में योजना संबंधी खामियां, उपलब्धि बढ़ा-चढ़ाकर पेश: कैग रिपोर्ट

महाराष्ट्र के जल जीवन मिशन में योजना संबंधी खामियां, उपलब्धि बढ़ा-चढ़ाकर पेश: कैग रिपोर्ट
Modified Date: July 10, 2026 / 08:32 pm IST
Published Date: July 10, 2026 8:32 pm IST

मुंबई, 10 जुलाई (भाषा) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में योजना निर्माण, कार्यान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और रखरखाव से जुड़ी गंभीर खामियों को लेकर सरकार की खिंचाई की है।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मार्च, 2024 तक राज्य में 85.15 प्रतिशत कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराने का दावा भ्रामक है, क्योंकि इसमें 27.74 लाख ऐसे परिवारों को भी शामिल किया गया, जिनके पास पहले से निजी या अपने स्रोत से नल कनेक्शन थे और जिन्हें अभी जल जीवन मिशन के तहत शामिल किया जाना बाकी था।

रिपोर्ट के अनुसार, इन निजी कनेक्शन को अलग करने पर दिसंबर, 2024 तक मिशन के तहत वास्तविक उपलब्धि 101.31 लाख कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन या केवल 69 प्रतिशत रही।

कैग ने कहा कि परीक्षण के लिए चुने गए किसी भी जिले में योजना लागू करने से पहले अनिवार्य आधारभूत सर्वेक्षण नहीं कराया गया। जांच में शामिल सभी 24 गांवों ने ग्राम कार्ययोजना तैयार की, लेकिन इनमें से 13 गांवों में ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के माध्यम से ग्राम पंचायत का अनिवार्य प्रस्ताव पारित नहीं कराया गया।

रिपोर्ट में जिला कार्ययोजनाओं की भी आलोचना की गई है।

इसमें कहा गया कि इन योजनाओं में जल जीवन मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कई अहम बिंदु शामिल नहीं थे। इनमें घरेलू नल कनेक्शन के तिमाही और वार्षिक लक्ष्य, वित्तीय योजना, जल सुरक्षा, भूमि और मानव संसाधन की आवश्यकता तथा जल स्रोतों की पहचान शामिल हैं।

कैग ने कहा कि व्यापक राज्य कार्ययोजना के अभाव में संसाधनों की योजना, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई।

रिपोर्ट में राज्य सरकार द्वारा संचालन एवं रखरखाव नीति तैयार नहीं करने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

कैग ने कहा कि ऐसी नीति के अभाव में तैयार की गई जलापूर्ति अवसंरचना के रखरखाव और पेयजल योजनाओं के संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

कैग ने कहा कि सामुदायिक भागीदारी में कमियों के कारण भी योजना के स्थायित्व और स्थानीय स्वामित्व के उद्देश्य प्रभावित हुए।

रिपोर्ट के अनुसार, 13 जलापूर्ति योजनाओं को जल स्रोत सुनिश्चित किए बिना मंजूरी दी गई, जिससे उनके पूरा होने में देरी हुई। वहीं, दो योजनाओं को जल शोधन संयंत्र की व्यवस्था के बिना स्वीकृति दी गई, जिसके कारण पेयजल के बजाय अशुद्ध पानी की आपूर्ति हुई।

कैग ने कहा कि राज्य सरकार निजी नल कनेक्शन को भी जल जीवन मिशन की उपलब्धियों में शामिल कर आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाती रही। जांच के लिए चुने गए छह जिलों में जेजेएम डैशबोर्ड पर 37.89 लाख नल कनेक्शन दर्शाए गए, जिनमें 9.64 लाख निजी या अपने स्रोत वाले कनेक्शन शामिल थे, जिन्हें अभी मिशन के दायरे में लाना बाकी है।

रिपोर्ट में कहा गया कि निजी या अपने स्रोत के नल कनेक्शन कार्यशील जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं करते, इसलिए उन्हें जल जीवन मिशन के तहत उपलब्धि नहीं माना जा सकता।

भाषा योगेश रमण

रमण


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