हरित विकास का मॉडल बनकर उभर रहा पश्चिम बंगालः अमित मित्रा

हरित विकास का मॉडल बनकर उभर रहा पश्चिम बंगालः अमित मित्रा

हरित विकास का मॉडल बनकर उभर रहा पश्चिम बंगालः अमित मित्रा
Modified Date: March 5, 2026 / 05:30 pm IST
Published Date: March 5, 2026 5:30 pm IST

कोलकाता, पांच मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रधान मुख्य सलाहकार अमित मित्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य चक्रीय (संसाधनों के महत्तम उपयोग) अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों के संयोजन के जरिये हरित विकास का एक मॉडल बनकर उभर रहा है।

पश्चिम बंगाल में वित्त विभाग के सलाहकार मित्रा ने यहां ‘बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ के स्थिरता सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के साथ आजीविका सृजन पर केंद्रित कई पहल कर रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो दशक में वैश्विक जलवायु संकट से करीब 2.8 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है और इस पृष्ठभूमि में पश्चिम बंगाल ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक गतिविधियों को जोड़ते हुए ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था’ का मॉडल विकसित करने की कोशिश की है।

मित्रा ने बताया कि राज्य में लगभग 800 किलोमीटर लंबी खाड़ियों की खुदाई की गई है ताकि वर्षा जल को रोका जा सके और झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए मीठे पानी की पारिस्थितिकी बनाई जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने इन खाड़ियों के किनारे मैंग्रोव वन लगाए हैं। उनके पत्ते पानी में गिरकर झींगों के लिए प्राकृतिक चारा बनते हैं।’’

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चक्रीय अर्थव्यवस्था के विकास की पहल से महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों को भी लाभ हुआ है और राज्य से झींगा निर्यात लगभग 50 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है।

मित्रा ने हरित परिवहन का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में 2,62,620 पंजीकृत हरित वाहन हैं, जिनके लिए 805 चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें करीब 75,000 दोपहिया और लगभग 1.63 लाख सौर ऊर्जा से चलने वाले तिपहिया वाहन शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में 3,763 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं भी पूरी होने के करीब हैं, जिनमें जर्मनी के विकास बैंक केएफडब्ल्यू का सहयोग शामिल है।

मित्रा ने भूमि एवं जल संरक्षण से जुड़ी ‘माटिर सृष्टि’ और ‘जल धरो जल भरो’ जैसी सरकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। ‘माटिर सृष्टि’ कार्यक्रम के तहत करीब 42,000 एकड़ बंजर भूमि को उत्पादक बागवानी क्षेत्र में बदला गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में जल संरक्षण के लिए करीब पांच लाख छोटे तालाब भी बनाए गए हैं, जिससे भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि राज्य लगभग 90 लाख एमएसएमई उद्यमों के साथ देश में दूसरे स्थान पर है। ऐसे में स्थिरता की दिशा में बदलाव के लिए इन छोटे उद्योगों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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