एयरलाइन में हिस्सेदारी लेने के हवाई अड्डा परिचालकों के प्रस्ताव का नफा-नुकसान देखेंगेः नायडू
एयरलाइन में हिस्सेदारी लेने के हवाई अड्डा परिचालकों के प्रस्ताव का नफा-नुकसान देखेंगेः नायडू
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एयरलाइन में हिस्सेदारी लेने के हवाई अड्डा संचालकों के प्रस्ताव से जुड़े फायदे एवं नुकसान का आकलन करेगी और संतुलित रुख अपनाते हुए फैसला करेगी।
इसके साथ ही नायडू ने कहा कि हवाई यात्रा की मजबूत मांग का पूरा लाभ उठाने के लिए भारतीय विमानन क्षेत्र में कम-से-कम पांच एयरलाइन होनी चाहिए, जिनमें से हरेक के पास 100 विमान हों।
नायडू ने छोटे शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ने की ‘उड़ान’ योजना के अगले चरण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने के मौके पर संवाददाताओं से कहा कि देश के आकार और बढ़ते हवाई अड्डा नेटवर्क को देखते हुए मंत्रालय इस दिशा में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में भी लोग अपने आसपास हवाईअड्डा चाहते हैं। इसलिए सरकार को मौजूदा जरूरतों के साथ-साथ 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजना बनानी होगी। उन्होंने कहा कि भारत में आदर्श रूप से 350 से अधिक हवाई अड्डे होने चाहिए।
किसी एयरलाइन में हिस्सेदारी लेने की अदाणी समूह की इच्छा के बारे में पूछे जाने पर नायडू ने कहा कि सरकार के लिए यह स्पष्ट है कि देश में और एयरलाइन होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हवाई अड्डों और एयरलाइन का एक साथ संचालन करने के मुद्दे पर विचार-विमर्श की जरूरत है। हम इसके फायदे और नुकसान देखेंगे।’’
नायडू ने कहा कि सरकार का पहला उद्देश्य यात्रियों को अधिक एयरलाइन के विकल्प उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस क्षेत्र में निवेश करना चाहता है तो सरकार इस विचार का समर्थन करती है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई के लिए लागू ओएमडीए समझौतों को छोड़कर ऐसा कोई नियम नहीं है जो हवाई अड्डा संचालकों को एयरलाइन में हिस्सेदारी रखने से रोकता हो। उन्होंने कहा कि इस मामले में संतुलित रुख अपनाने की जरूरत है।
हालांकि, नागर विमानन मंत्री ने कहा कि इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रमुख हवाई अड्डों के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत किए गए ‘परिचालन, प्रबंधन एवं विकास समझौते’ (ओएमडीए) में हवाई अड्डा संचालकों के एयरलाइन में स्वामित्व को लेकर पाबंदियां हैं।
दिल्ली और मुंबई समेत प्रमुख हवाई अड्डे पीपीपी मॉडल के तहत संचालित होते हैं, जिनमें भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) भी हिस्सेदार है।
नागर विमानन मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क मजबूत करने के लिए उड़ान योजना के अगले चरण के तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ 21 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
उड़ान योजना के तहत मंत्रालय, संबंधित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के बीच कुल 21 एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एएआई इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी है।
मंत्रालय ने कहा कि इन समझौतों से विमानन बुनियादी ढांचे के विकास और कम सेवा वाले एवं बिना हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों में हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सहयोग मजबूत होगा।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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