चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल को जिम्मेदार मानना गलत: सरकार

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चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल को जिम्मेदार मानना गलत: सरकार

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 06:31 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 06:31 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का उपयोग बढ़ने से चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है।

सरकार ने कहा कि घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी मौसम से पहले बढ़ी मांग और जमाखोरी के कारण कीमतों में वृद्धि हुई है। कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने चीनी के भंडार की सीमा तय करने के साथ शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘चीनी की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी के लिए एथनॉल उत्पादन को लेकर गन्ने के उपयोग को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है।’’

मंत्रालय ने कहा कि पेट्रोल में मिलाने के लिए एथनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीनी की हिस्सेदारी वास्तव में 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 सत्र में करीब नौ प्रतिशत रह गई है। वहीं, एथनॉल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से होता है।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब खुदरा चीनी की कीमत 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के लिए अनुमान से कम चीनी उत्पादन, त्योहारी मौसम से पहले बढ़ी मांग, मौसम संबंधी कारणों से फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी तथा उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा अटकलों और जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया।

कीमतों पर अंकुश लगाने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने देशभर में चीनी कारोबारियों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन की भंडार सीमा तय की है। एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को भी 15 दिन की खपत से अधिक चीनी का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा, जमाखोरी और कृत्रिम कमी की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमों को चीनी मिलों में भंडार का भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा सत्र में घरेलू चीनी उत्पादन करीब 3.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों ने शुरुआत में करीब 3.43 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया था।

सरकार ने उत्पादन में कमी के लिए गन्ने में ‘रेड रॉट’ (लाल सड़न रोग) और टॉप बोरर (कीट) रोग तथा अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव को जिम्मेदार ठहराया है।

उसने कहा कि अक्टूबर में नया पेराई सत्र शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए मौजूदा भंडार पर्याप्त है।

वैश्विक बाजार में भी आपूर्ति की स्थिति तंग हो रही है। सरकार के अनुमान के अनुसार, 2026-27 में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी हो सकती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतें 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गईं, यानी 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

सरकार ने कहा कि एथनॉल कार्यक्रम ने चीनी उद्योग में संरचनात्मक अधिशेष की समस्या से निपटने, मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और किसानों को भुगतान में सुधार करने में मदद की है।

भारत में आमतौर पर सालाना 3.2-3.4 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 2.8-2.9 करोड़ टन है। अधिशेष वाले वर्षों में अतिरिक्त भंडार से मिलों की कार्यशील पूंजी फंस सकती है और गन्ना किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है।

सरकार ने कहा कि 20 अगस्त तक 2025-26 सत्र के गन्ना किसानों के बकाये का 97 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका था।

उसने कहा कि उद्योग की बेहतर वित्तीय स्थिति से सरकारी सहायता पर उसकी निर्भरता कम हुई है। वर्ष 2014 से 2021 के बीच करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई थी, लेकिन 2021-22 के बाद ऐसी कोई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है।

भाषा योगेश रमण

रमण