Holi 2026: रसोई की साधारण भाजियों से रंगेंगे आपके गाल..! बस्तर की दीदियों की क्रिएटिविटी अलग लेवल पर, बाजार के गुलाल को भूल जाएंगे

Holi 2026: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हर्बल गुलाल बनाने के लिए सब्जियों के प्राकृतिक रंगों से रंगकर और उसमें गुलाब गेंदा, पलाश के फूलों की पंखुड़ियों, गुलाब जल, इत्र आदि मिलाकर हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है।

Holi 2026: रसोई की साधारण भाजियों से रंगेंगे आपके गाल..! बस्तर की दीदियों की क्रिएटिविटी अलग लेवल पर, बाजार के गुलाल को भूल जाएंगे

holi 2026/ image source: IBC24

Modified Date: February 18, 2026 / 04:44 pm IST
Published Date: February 18, 2026 4:29 pm IST
HIGHLIGHTS
  • प्राकृतिक फूलों से बना गुलाल
  • महिलाओं को मिला प्रशिक्षण
  • बिहान योजना की अनूठी पहल

Holi 2026: रायपुर: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हर्बल गुलाल बनाने के लिए सब्जियों के प्राकृतिक रंगों से रंगकर और उसमें गुलाब गेंदा, पलाश के फूलों की पंखुड़ियों, गुलाब जल, इत्र आदि मिलाकर हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है। मानव अनुकूल होने से इस हर्बल गुलाल को बिना किसी चिंता के होली के त्योहार में उपयोग किया जा सकता है। देखा जाता है कि आजकल बाजार में मिलने वाले रंगों में भारी मिलावट की जाती है। जिससे चर्म रोग से जुड़ी गंभीर समस्याएं होती हैं। वहीं, वस्तर की महिलाओं द्वारा विशेष पहल की है। चलिए विस्तार से पूरा मामला बताते हैं।

Herbal Gulal Bastar Women SHG: पालक भाजी से हरे रंग का बनेगा गुलाल

पलाश के फूलों से केसरिया गुलाल, पालक भाजी से हरे रंग का गुलाल तथा लाल भाजी से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जा रहा है। इस गुलाल में रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं होने से यह गुलाल त्वचा, आंख, बाल आदि के लिये हानिकारक नहीं है। मानव अनुकूल होने से इस हर्बल गुलाल को बिना किसी चिंता के होली के त्योहार में उपयोग किया जा सकता है।

सेहत और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहेंगे रंग

बस्तर जिले में इस बार होली का त्यौहार न केवल रंगों भरा होगा, बल्कि सेहत और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिलाएं आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर गुलाल तैयार करना सीख रही हैं।

इस अनूठी पहल की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं अपनी रसोई और बाड़ी में मिलने वाली प्राकृतिक वस्तुओं जैसे पालक, लाल भाजी, चुकंदर और फूलों का उपयोग कर सतरंगी गुलाल तैयार करेंगी। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों और गुलाल में अक्सर हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जो त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान पहुँचाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए बिहान की दीदियां कॉर्न फ्लावर के आधार (बेस) में चुकंदर और भाजी के अर्क को मिलाकर पूरी तरह चर्म-रोग मुक्त और इको-फ्रेंडली गुलाल का उत्पादन करेंगी।

Bstar News: एक हजार किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य

प्रशिक्षण के उपरांत महिलाओं ने इस वर्ष 500 किलो से लेकर एक हजार किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उत्पादित गुलाल की पहुंच जन-जन तक बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों और विभिन्न शासकीय कार्यालयों में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। साथ ही जनपद स्तर के स्थानीय बाजारों में भी इस शुद्ध देशी गुलाल का विक्रय किया जाएगा। बिहान से जुड़ी इन महिलाओं के लिए यह केवल रंग बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। इस प्रयास से न केवल बस्तर की महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी रसायनों के खतरे से दूर एक सुरक्षित और खुशहाल होली मनाने का विकल्प मिलेगा।

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लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।