टीम BJP तैयार.. Congress को इंतजार! क्या सत्तापक्ष में नियुक्तियों में देरी भाजपा के लिए चुनावी माहौल बनाने में मददगार साबित होगी?

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Before the election, the BJP changed 13 district presidents

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  • Publish Date - October 20, 2022 / 12:08 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:19 PM IST

सौरभ सिंह/रायपुरः तीन टर्म तक सरकार चलाने के बाद बीते चुनाव 2018 में करारी हार झेलने वाली बीजेपी तकरीबन 3 साल तक इसी सवाल से जूझती नजर आई की विपक्ष एक्टिव क्यों नहीं है? लेकिन अब जबकि अगले साल 2023 में विधानसभा चुनाव हैं। प्रदेश भाजपा में धार लाने के लिए बदलावों की रफ्तार काफी तेज है। पार्टी ने पहले प्रदेश प्रभारी बदला,फिर प्रदेश अध्यक्ष,नेता प्रतिपक्ष बदला अब प्रदेश में 13 जिला अध्यक्षों को बदल दिया गया है। खास बात ये कि इसमें 5 नए बने जिलों में भी नियुक्ति कर दी है, जबकि कांग्रेस अभी तक इन नवगठित जिलों में नियुक्ति नहीं कर पाई है। क्या संगठन में बदलाव की बदौलत भाजपा, एक्टिव होकर कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ाती जा रही है। क्या सत्तापक्ष में नियुक्तियों में देरी भाजपा के लिए चुनावी माहौल बनाने में मददगार साबित होगी?

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आगामी 2023 विधानसभा चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के लिए काफी अहम है। कांग्रेस जहां दोबारा सत्ता में आने के लिए कमर कस ली है तो वहीं बीजेपी अपनी खोई हुई ताकत को संगठन के जरिए हासिल करना चाहती है,,इसलिए लगातार बदलाव हो रहे है>प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रभारी के बाद 13 नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए है। इनमें से 5 नवगठित जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सक्ती और बिलाईगढ़-सारंगढ़ में भी बीजेपी ने जिलाध्यक्ष नियुक्त कर दिए है। हालांकि पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष इन नियुक्तियों को सामान्य बता रहे हैं।

एक तरफ चुनाव से पहले बीजेपी संगठन ताबड़तोड़ सर्जरी कर रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन इन जिलों में अब तक नियुक्ति नहीं कर पायी है। जिलाध्यक्ष नियुक्त नहीं होने से अविभाजित जिला के अध्यक्ष के पास ही जिम्मेदारी है। कांग्रेस का कहना है कि संगठन चुनाव के कारण देरी हुई है। जल्द नए जिलों में अध्यक्ष नियुक्त होंगे। बीजेपी में लगातार बदलाव पर भी कांग्रेस तंज कस रही है।

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2018 में बीजेपी की करारी हार उनके नेताओं और कार्य़कर्ताओं का असंतुष्ट होना भी था..लिहाजा मैदान में उतरने से पहले बीजेपी इन नेताओं-कार्य़कर्ताओं को साधते हुए जिला और मंडल स्तर तक बदलाव कर जिम्मेदारी दे रही है। जबकि कांग्रेस अभी भी नए जिलों में चेहरे तलाश रही है। अब सवाल ये कि बीजेपी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने सर्जरी पर सर्जरी किए जा रही है तो कांग्रेस को किस बात का इंतजार है।