ठाणे, 22 जुलाई (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने 54 वर्षीय एक व्यक्ति को आग लगाकर अपनी पत्नी को मार डालने के आरोप से यह कहते हुए बरी कर दिया कि जब मृत्यु से पूर्व दिए गए कई विरोधाभासी बयान हों तब सबसे पहले के बयान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सत्र न्यायाधीश आर डी सावंत ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में नाकाम रहा, ऐसे में ठाणे के सुरेश संजीव शेट्टी पर लगे सारे आरोप खारिज किये जाते हैं।
शेट्टी पर आरोप था कि 20 मार्च 2007 को टिन-शेड वाले कमरे में शराब पीने के बाद उसने अपनी पत्नी मीना पर केरोसिन डाला और उसे आग लगा दी। मीना 60 प्रतिशत तक जल गई थी और तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई।
वकील राजन सालुंखे ने अदालत में शेट्टी का प्रतिनिधित्व किया।
न्यायाधीश सावंत ने घटना के दो दिन बाद दर्ज किए गए ‘मृत्यु पूर्व बयान’ पर अभियोजन पक्ष के बहुत ज़्यादा निर्भर रहने की आलोचना की।
न्यायाधीश ने कहा कि जब ‘मृत्यु पूर्व के कई बयान’ हों और वे एक-दूसरे से मेल न खाते हों, तो सबसे पहले दिए गए बयान को – जो घटना के समय के सबसे करीब होता है और जिस पर बाहरी असर पड़ने की संभावना सबसे कम होती है – ‘‘आमतौर पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’
घटना के दिन महिला के शुरुआती ‘मृत्यु पूर्व बयान’ का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि ‘‘उस महिला ने बताया था कि चाय बनाते समय स्टोव गलती से फट गया था, उसके पति खुद उसे अस्पताल ले गए थे तथा उसे उनके ख़िलाफ कोई शिकायत नहीं थी…।’’
दूसरे बयान के संबंध में, अदालत ने कहा, “दो दिन की जानबूझकर चुप्पी और उसके बाद अचानक एवं पूरी तरह से पलट जाना, मनगढ़ंत कहानी का स्पष्ट संकेत है और इससे बयान पूरी तरह अविश्वसनीय हो जाता है। भौतिक और मौके पर मौजूद साक्ष्य स्वतंत्र रूप से आकस्मिक घटना की पुष्टि करते हैं।”
अदालत ने अभियोजन पक्ष का यह तर्क भी खारिज कर दिया कि आरोपी अपराध के बाद कई वर्षों तक फरार रहा। अदालत ने कहा, “आरोपी का फरार होना सबूत का विकल्प नहीं माना जा सकता।”
इसके बाद अदालत ने शेट्टी के खिलाफ सभी आरोप खारिज कर दिए।
भाषा राजकुमार नरेश
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