Bilaspur High Court News: पाली के 23 भू-विस्थापित परिवारों को HC से राहत.. कहा ‘रोजगार का मामला राज्य की नीति अनुसार तय होगा, न कि कोल इंडिया की पुनर्वास नीति-2012 के आधार पर’..
Bilaspur High Court Instructions to Coal India: बिलासपुर हाईकोर्ट ने 23 भू-विस्थापित परिवारों को राहत देते हुए SECL को रोजगार दावों पर पुनर्विचार के निर्देश दिए।
Bilaspur High Court Instructions to Coal India || AI Generated File
- 23 भू-विस्थापित परिवारों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली।
- रोजगार दावा राज्य पुनर्वास नीति-2007 के आधार पर तय होगा।
- SECL को 45 दिनों में नया निर्णय लेने के निर्देश।
बिलासपुर: कोरबा जिले के ग्राम पाली के 23 भू-विस्थापित परिवारों को हाइकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने SECL को उनके रोजगार दावों पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। (Bilaspur High Court Instructions to Coal India) कोर्ट ने कहा है, भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार का मामला राज्य की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति-2007 के अनुसार तय होगा, न कि कोल इंडिया की पुनर्वास नीति-2012 के आधार पर.. मामले में जस्टिस एन के चंद्रवंशी के सिंगल बेंच में सुनवाई हुई।
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जिसकी भूमि अधिग्रहित उन्हें रोजगार में प्राथमिकता देने का प्रावधान
दरअसल, याचिकाकर्ताओं की जमीन कुसमुंडा विस्तार परियोजना के लिए वर्ष 2010 में अधिग्रहित की गई थी। SECL ने उनके रोजगार दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अधिग्रहित भूमि 0.54 एकड़ की निर्धारित कटऑफ सीमा से कम है। कोर्ट ने कहा है, राज्य की पुनर्वास नीति में ऐसी कोई न्यूनतम भूमि सीमा निर्धारित नहीं है। यदि किसी परिवार की पूरी कृषि भूमि अधिग्रहित हो गई है तो उसे रोजगार में प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
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45 दिनों के भीतर नए निर्णय के निर्देश
कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा है, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति को वैधानिक संरक्षण प्राप्त है और वही प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने यह भी माना कि भूमि गंवाने वालों के पुनर्वास और आजीविका का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा है। (Bilaspur High Court Instructions to Coal India) कोर्ट ने SECL द्वारा पारित सभी अस्वीकृति आदेशों को निरस्त करते हुए निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं अथवा उनके नामित पात्र पारिवारिक सदस्यों को रोजगार देने के संबंध में 45 दिनों के भीतर नया निर्णय लिया जाए।
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