Chhattisgarh High Court Bilaspur : “पुलिस प्राइवेट वसूली एजेंट नहीं…” फाइनेंस कंपनी का खाता फ्रीज करने पर भड़का हाईकोर्ट, पुलिस को लगाई तगड़ी फटकार
एक फाइनेंस कंपनी के 53.47 करोड़ रुपये होल्ड करने के मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को असंगत और मनमानी बताते हुए आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस किसी निजी वसूली एजेंट की तरह काम नहीं कर सकती।
Chhattisgarh High Court Bilaspur / Image Source ; X
- हाईकोर्ट ने कहा- "पुलिस प्राइवेट वसूली एजेंट नहीं है"।
- NBFC के 53.47 करोड़ रुपये होल्ड करने का आदेश रद्द।
- कुछ लाख के विवाद में करोड़ों की रकम फ्रीज करने पर कोर्ट सख्त।
बिलासपुर– Chhattisgarh High Court Bilaspur पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। एक मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है कि पुलिस निजी वसूली एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकती। कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 बीनएसएस के नियमों का उल्लंघन कर एक फाइनेंस कंपनी एनबीएफसी के बैंक खाते में राशि होल्ड करने के पुलिस के आदेश को खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, नई दिल्ली की ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड एनबीएफसी कंपनी उद्योगों और छोटे व्यवसायियों को लोन देने का काम करती है। Oxxyzo Financial Services Ltd कंपनी का एक खाता कोटक महिंद्रा बैंक रायपुर ब्रांच में संचालित है, जिसमें देश भर के कर्जदारों की ईएमआई के तौर पर प्रतिदिन 12 से 15 करोड़ रुपए आते हैं। कंपनी ने रायपुर की एक फर्म श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड को कच्चा माल खरीदने के लिए करीब 10 करोड़ रुपए की लोन सुविधा दी। बाद में श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट्स का माल सप्लाई करने वाली एक अन्य कंपनी ओएफबी टेक से वजन में धोखाधड़ी को लेकर विवाद हो गया, जिसके बाद मंदिर हसौद थाना में करीब 6.9 लाख रुपए (जो बाद में 43.38 लाख रुपये आंकी गई) की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया।
53.47 करोड़ रुपए की राशि को किया होल्ड
मामले की जांच करते हुए मंदिर हसौद पुलिस ने बिना किसी ठोस कानूनी आधार के आक्सीजो फाइनेंस कंपनी के खाते से लेनदेन पर पूरी तरह रोक लगा दी और बाद में कंपनी के 53,47,17,835 रुपए (53.47 करोड़ रुपए) की राशि को होल्ड कर दिया। बाद में जब मामला बढ़ा, तो पुलिस ने इसे घटाकर 43.38 लाख रुपए होल्ड रखने का नया आदेश जारी किया।
Kotak Mahindra Bank Raipur Account Freeze आक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने लगाई याचिका
पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ आक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिसमें बताया गया कि कंपनी न तो इस एफआईआर में आरोपी है और न ही कंपनी का माल की शॉर्ट-सप्लाई या धोखाधड़ी से कोई सीधा संबंध है। पुलिस ने महज एक सिविल, कमर्शियल विवाद में दबाव बनाने के लिए कंपनी का पूरा खाता फ्रीज कर दिया। जिससे उसका रोजमर्रा का बिजनेस ठप हो गया। यह कार्रवाई पूरी तरह से मनमानी, दुर्भावनापूर्ण और व्यापार करने के संवैधानिक अधिकार का हनन है।
13 अप्रैल 2026 के आदेश को किया निरस्त
मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा कि पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, न कि किसी कमर्शियल विवाद में एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए प्राइवेट रिकवरी एजेंट की तरह काम करना। एफआईआर में शुरुआती नुकसान सिर्फ कुछ लाख रुपए का बताया गया था, उसके एवज में जनता के पैसे का प्रबंधन करने वाली एक विनियमित संस्था के 53 करोड़ से अधिक रुपए होल्ड कर देना पूरी तरह से असंगत, अतार्किक और दंडात्मक है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा जारी 13 अप्रैल 2026 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है. जिसके तहत राशि को होल्ड पर रखा गया था।
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