Tadmetla Attack Bilaspur High Court || Image- IBC24 News File
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का 16 साल पहले CRPF जवानों पर हुए बड़े हमले यानी ‘ताड़मेटला कांड’ को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। दरअसल इस मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने कई आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। (Tadmetla Attack Bilaspur High Court) हाईकोर्ट ने अपने फैसले में प्रत्यक्ष साक्ष्यों की कमी, अधूरी परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कड़ी और जांच में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों का उल्लेख किया है। 76 सुरक्षाकर्मियों की शहादत जैसे गंभीर अपराध के बावजूद, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष बिना किसी उचित संदेह के दोष सिद्ध करने में विफल रहा।
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हाईकोर्ट ने राज्य की अपील को खारिज करते हुए कहा कि यद्यपि 76 जवानों की शहादत “गहरी त्रासदी और राष्ट्रीय चिंता का विषय है,” लेकिन कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्यों के अभाव में सजा बरकरार नहीं रखी जा सकती।
हाईकोर्ट ने भविष्य में गंभीर अपराधों की जांच में उच्च मानक सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। (Tadmetla Attack Bilaspur High Court) इनमें फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों का तत्काल संग्रहण, ‘चेन ऑफ कस्टडी’ का सही रखरखाव और समय पर शिनाख्ती परेड आयोजित करना शामिल है।
अप्रैल, 2010 के बीच की घटना से जुड़ा है। CRPF की 62वीं बटालियन के 82 सदस्यों का दल राज्य पुलिस के साथ सुकमा जिले के चिंतालनार के पहाड़ी जंगलों में ‘एरिया डोमिनेशन पेट्रोल’ पर था। 6 अप्रैल, 2010 की सुबह ताड़मेटला गांव के पास नक्सलियों ने पुलिस बल पर घात लगाकर हमला किया।
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आरोप है कि हमला करने वाले नक्सलियों ने भारी गोलाबारी और विस्फोटकों का इस्तेमाल किया, जिसमें CRPF के 75 जवान और राज्य पुलिस का एक सदस्य शहीद हो गया। अभियोजन के अनुसार, नक्सलियों ने हथियार लूट लिए और घटनास्थल पर टिफिन बम भी लगाए थे। (Tadmetla Attack Bilaspur High Court) इस मामले में IPC की धारा 148, 120B, 396 (76 मामलों में), आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 5 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया था। 7 जनवरी, 2013 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दक्षिण बस्तर ने आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसे राज्य सरकार ने इस अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।