झीरम घाटी हमला मामले में आए फैसले को कांग्रेस ने बताया अधूरा न्याय, भाजपा ने किया स्वागत

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झीरम घाटी हमला मामले में आए फैसले को कांग्रेस ने बताया अधूरा न्याय, भाजपा ने किया स्वागत

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  • Publish Date - September 5, 2026 / 09:01 PM IST,
    Updated On - September 5, 2026 / 09:01 PM IST

रायपुर, पांच सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में 2013 में हुए झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने को ‘अधूरा न्याय’ बताया है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अदालत के फैसले का स्वागत किया।

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने इस मामले में सभी 10 आरोपियों को शनिवार को दोषी ठहराया। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्या चरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत 29 लोग मारे गए थे।

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ‘एक्स’ पर एक लंबी पोस्ट में कहा कि यह फैसला ‘अधूरा न्याय’ लगता है क्योंकि हमले के पीछे की कथित बड़ी राजनीतिक साजिश की जांच नहीं की गई।

बघेल ने कहा, ‘ऐसे मामले में, सिर्फ 10 निचले स्तर के नक्सलियों को सजा देना न्याय नहीं कहा जा सकता।’

उन्होंने कहा, ”एनआईए ने खुद ही कहा था कि झीरम की घटना को 200 लोगों ने अंजाम दिया था। एनआईए स्वयं ने 39 लोगों को मुलज़िम बनाया था। ये और बात है कि जांच में लगातार लापरवाही बरत रही एनआईए 10 से अधिक लोगों को पकड़ ही नहीं पाई।”

दुर्ग में संवाददाताओं से बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि झीरम घाटी हमला मामले में 10 आरोपियों को सजा मिलना बस्तर, पीड़ितों के परिवारों या कांग्रेस के लिए न्याय नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला एक राजनीतिक साज़िश और सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस नेताओं को खत्म करने के मकसद से की गई ‘सुपारी किलिंग’ का नतीजा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच अधूरी थी और केवल उन्हीं लोगों को सज़ा हुई जिन्हें गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, भाजपा ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत किया और एनआईए की जांच का बचाव किया।

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि लंबे इंतज़ार के बाद आया यह फ़ैसला संतोषजनक है और इससे सच को जनता के सामने लाने में मदद मिलेगी।

जब उनसे पूछा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल दावा करते थे कि झीरम घाटी घटना से जुड़े सबूत उनकी जेब में हैं, तो पांडेय ने कहा कि बघेल के पास सत्ता में रहते हुए (2018 से 2023 तक) झीरम हमले के बारे में अपने दावों से जुड़े सबूत पेश करने के लिए पांच साल का समय था।

पांडेय ने पूछा, ‘अगर आपके पास सबूत थे, तो आपने अपनी पांच साल की सरकार के दौरान उन्हें अदालत के सामने पेश क्यों नहीं किया?’

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी पांडेय की बात का समर्थन करते हुए कहा, ‘आप (कांग्रेस) पांच साल तक सत्ता में थे। आपने (किसी के भी) ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की?’

उन्होंने कहा कि अदालत ने एनआईए की जांच को सही माना है। जांच का जिम्मा एजेंसी को उस समय सौंपा गया था जब केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी।

बस्तर के झीरम घाटी में 25 मई, 2013 को हुए हमले में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का लगभग पूरा शीर्ष नेतृत्व खत्म हो गया था।

भाषा संजीव जोहेब

जोहेब