भोपालः Bhopal News मध्य प्रदेश में नगरीय प्रशासन विभाग यानी शहर सरकार की कारस्तानियों पर कभी हाईकोर्ट फटकारती है। कभी उन्हीं की पार्टी के नेता आवाज़ उठाते हैं तो कभी NGT यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कड़ी आपत्ति उठाती है। मगर मज़ाल है जो विभाग के ज़िम्मेदारों को ज़रा सा भी फ़र्क पड़ जाए। ताजा मामला भोपाल से जुड़ा हुआ है। शहर में स्थित GG फ्लाई-ओवर महज एक साल में ही उखड़ने लगी है। इसे ठेकेदार को सुधारना था, लेकिन इसके लिए फिर तकरीबन 5 करोड़ का टेंडर निकाल दिया। कोर्ट ने इसे लेकर जमकर फटकार लगाईं। NGT ने कहा कि बड़ी झील के कैचमेंट एरिया पूरा सीमांकन करने के लिए झील का फुल टैंक लेबल रहना ज़रूरी है, मगर भोपाल नगर निगम ने भदभदा के गेट खोल दिए ताकि जो झील के आस-पास अतिक्रमण हैं वो कैचमेंट एरिया से बाहर दिख सकें। ऐसे ही भोपाल में एक रिहायशी सोसायटी की रोड ही धंसक गई। कई गाड़ियां उसमें समा गईं। यह भी कैचमेंट एरिया में बनी थी। कांग्रेस इसे लेकर कह रही है मनमाने तरीके से काम कर रही है।
Bhopal News मसला सिर्फ भोपाल का नहीं है बल्कि ग्वालियर में हाईकोर्ट कई बार दखल दे चुकी है. बल्कि उसने तो सड़कों की गुणवत्ता नापने की सैम्पलिंग अपनी टीम से करवाना शुरू कर दिया है। मगर भाजपा की मज़बूरी है कि उसे सारे मसलों को जस्टिफाई तो करना ही पड़ेगा। भाजपा तर्क दे रही है कि कांग्रेस को विकास नहीं दिख रहा है। इसलिए वो किसी को मामले को पकड़ कर मुद्दा बना रही है।
सवाल ये है कि भोपाल की बड़ी झील के कैचमेंट एरिया का निर्धारण क्या वाकई कभी हो पाएगा? यदि हुआ तो उसके अतिक्रमण हटवा देगा नगर निगम? सवाल सड़कों पर भी है कि कोर्ट सहित अपने नेताओं के निशाने पर आ रही नगर सरकार आखिर कब तक इन पर बयानों के पैबंद लगाती रहेगी।