बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने ईसाई धर्म के अनुयायियों के अधिकारों को लेकर अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति अपने निवास स्थान पर प्रार्थना सभा आयोजित कर सकता है और इस पर सामान्य रूप से रोक नहीं लगाई जा सकती।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता के तहत लोगों को अपने घर में प्रार्थना करने और सभा आयोजित करने का अधिकार है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसे आयोजनों से ध्वनि प्रदूषण होता है या कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होती है, तो संबंधित पक्ष इसकी शिकायत कर सकते हैं। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि अपने निवास में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभाओं पर प्रशासनिक रोक नहीं लगाई जा सकती, लेकिन नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
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