मुंबई, 15 मई (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पूर्व नेता आनंद परांजपे को किसी विपक्षी दल में शामिल होने से रोकने के लिए शिवसेना में शामिल किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके दलबदल को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली पार्टी (राकांपा) को इस बारे में पहले ही भरोसे में ले लिया गया था।
परांजपे ने बृहस्पतिवार को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से इस्तीफा दे दिया और बाद में वह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे।
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी के साथ राकांपा और शिवसेना दोनों शामिल हैं।
शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सामंत ने कहा कि ठाणे और कल्याण लोकसभा क्षेत्रों से दो बार शिवसेना के सांसद रह चुके परांजपे को शिवसेना में इसलिए शामिल किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के किसी घटक दल में शामिल न हों।
शिवसेना नेता ने कहा, ‘हमारा मानना था कि आनंद परांजपे को एमवीए के किसी भी दल में नहीं जाना चाहिए।’
उन्होंने कहा, ‘जब हमने परांजपे को शिवसेना में शामिल करने का फैसला किया, तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार को फोन करने की कोशिश की, लेकिन वह एक कार्यक्रम में थीं और तुरंत उनसे बात नहीं हो सकी।’
सामंत ने बताया कि इसके बाद पार्टी ने राकांपा सांसद पार्थ पवार से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे भी संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद, उनके छोटे भाई जय पवार से संपर्क किया गया और उन्हें परांजपे को शिवसेना में शामिल किए जाने के फैसले की जानकारी दी गई।
मंत्री ने कहा, ‘राकांपा नेताओं को इसलिए सूचित किया गया था क्योंकि हम महायुति गठबंधन के भीतर कोई गलतफहमी नहीं चाहते थे।’
शिवसेना के दिग्गज दिवंगत नेता प्रकाश परांजपे के बेटे आनंद परांजपे ने साल 2012 में शिवसेना छोड़ दी थी और राकांपा में शामिल हो गए थे। जुलाई 2023 में जब दिवंगत अजीत पवार महायुति सरकार में शामिल हुए थे, तब उन्होंने उनका साथ दिया था, जिसके कारण राकांपा में विभाजन भी हुआ था।
परांजपे ने अपने पिता के निधन के बाद 2008 में शिवसेना उम्मीदवार के रूप में ठाणे लोकसभा सीट का उपचुनाव जीता था। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में वह इसी जिले की कल्याण सीट से शिवसेना के टिकट पर निर्वाचित हुए थे।
हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में वह कल्याण सीट से अविभाजित शिवसेना के श्रीकांत शिंदे से चुनाव हार गए थे।
खबरों के मुताबिक, राकांपा की ओर से विधान परिषद की सीट का टिकट न मिलने के कारण परांजपे पिछले कुछ समय से असंतुष्ट चल रहे थे।
भाषा सुमित नरेश
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