Bhojshala Case Update: ‘धार भोजशाला में सिर्फ हिंदू ही करेंगे पूजा…ये एक मंदिर है’, हाईकोर्ट ने सुनाया अपना फैसला

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Bhojshala Case Update: 'धार भोजशाला में सिर्फ हिंदू ही करेंगे पूजा...ये एक मंदिर है', हाईकोर्ट ने सुनाया अपना फैसला

Bhojshala Case Update | Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • भोजशाला को कोर्ट ने मंदिर घोषित किया
  • सर्वे में मां सरस्वती की मूर्ति मिली
  • कोर्ट ने हिंदू पक्ष को दी पूजा करने की इजाजत

धार: Bhojshala Case Update मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है। (High Court Bhojshala Decision) अदालत ने भोजशाला को मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की ​इजाजत भी दे दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब हिंदू की बड़ी जीत मानी जा रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हमने पाया है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है। हम यह भी दर्ज करते हैं कि ऐतिहासिक साहित्य यह स्थापित करता है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला के रूप में परमार वंश के राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता था। आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने 12 मई को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ आज इस प्रकरण में अंतिम निर्णय सुनाया है। (Court Decision on Bhojshala)

अदालत ने क्या-क्या कहा?

Dhar Bhojshala News अदालत ने मुस्लिम पक्ष के लिए कहा कि वो मस्जिद की जमीन के लिए आवेदन कर सकता है। हाई कोर्ट ने कहा कि एएसआई अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले में स्थापित मिसाल के आधार पर और पुरातात्विक साक्ष्यों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय एएसआई द्वारा किए गए (ASI Survey Bhojshala) ऐसे बहु-विषयक अध्ययनों के निष्कर्षों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों पर सुरक्षित रूप से भरोसा कर सकता है।

सीनियर एडवोकेट ने कही ये बात

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर एडवोकेट मनीष दुक्का ने बताया कि कोर्ट ने फैसला सुनाया है। भोजशाला माँ सरस्वती का मंदिर है। कोर्ट ने सरकार को निर्बाध रूप से निरंतर पूजा चालू करवाने के निर्देश दिए। उम्मीद है कि आज से ही पूजा निरंतर रूप से शुरू की जाएगी। कोर्ट ने कहा- मुस्लिम पक्ष चाहे तो धार में मस्जिद बनाने की अलग ज़मीन की माँग कर सकते हैं। हालांकि वो ज़मीन भोजशाला परिसर की नहीं होगी। लंदन से माँ वाग्देवी की मूर्ति लाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी सरकार को निर्देश दिए हैं।

2022 में हिंदू पक्ष की ओर से की गई थी दायर

यह याचिका वर्ष 2022 में हिंदू पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई थी। (Bhojshala Controversy) याचिका में भोजशाला परिसर से जुड़े धार्मिक अधिकारों और व्यवस्थाओं को लेकर कई मांगें उठाई गई थीं। करीब चार वर्षों तक चले इस कानूनी विवाद के बाद अब फैसला आ गया है। इस दौरान मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से लगातार कानूनी और सामाजिक गतिविधियां जारी रहीं। (Bhojshala Survey Case) उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद मामले की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल से शुरू हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हुई और सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

भोजशाला सुनवाई के प्रमुख बिंदु

  • 12 मई 2026, मंगलवार को इंदौर में भोजशाला प्रकरण की सुनवाई उच्च न्यायालय में पूरी हुई थी।
  • वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा उच्च न्यायालय इंदौर में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य के लिए याचिका क्रमांक 10497/ 2022 लगाई गई थी।
  • इसी प्रकरण में आगे चलकर वर्ष 2024 में भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया।
  • वर्ष 2026 में 23 जनवरी,शुक्रवार वसंत पंचमी के अवसर पर दिनभर अबाधित पूजा अर्चना हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश इसी प्रकरण में दिया गया था।
  • भोजशाला प्रकरण की सुनवाई 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में निरंतर जारी थी।
  • अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2026 तक हिंदू पक्ष की ओर से तर्क रखे गए।
  • इसके पश्चात मुस्लिम पक्ष एवं अन्य पक्षों द्वारा तर्क रखे गए।
  • इस मुख्य याचिका के साथ ही चार अन्य याचिका और एक अपील भी क्लब थी जिनकी भी सुनवाई पूरी हो गई।

हिंदूओं की याचिका की प्रमुख मांगे

  • हिंदू समाज को भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जावे।
  • केंद्र सरकार को आदेशित किया जावे कि भोजशाला हेतु एक ट्रस्ट बनाया जावे जिससे कि भोजशाला का संचालन एवं प्रबंध किया जा सके।
  • इसी ट्रस्ट को यह आदेशित किया जावे कि माँ सरस्वती की प्रतिमा की पूजा एवं अर्चना निर्बाध रूप से कराई जावे।
  • भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज बंद हो।
  • भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त किया जावे एवं हिंदू समाज को नियमित प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मिले।
  • ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः वापस लाया जावे एवं भोजशाला धार में स्थापित किया जावे।

 

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भोजशाला क्या है?

भोजशाला धार में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसे राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित किया था।

हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर माना और हिंदू पक्ष को पूजा करने की अनुमति दी।

मुस्लिम पक्ष को क्या अधिकार मिला?

मुस्लिम पक्ष मस्जिद की जमीन के लिए आवेदन कर सकता है।