Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,CG High Court On Money Laundering Case /Photo Credit: IBC24
बिलासपुर। CG High Court On Money Laundering Case: महादेव ऑनलाइन सट्टा एप और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी कंपनियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए करीब 423 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों और डीमैट खातों की वैल्यू सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है और यदि फ्रीज किए गए शेयरों की कीमत गिरती है तो इससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
CG High Court On Money Laundering Case जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने अपने दिए गए फैसले में कंपनियों को यह छूट दी है कि वे फ्रीज किए गए शेयरों को बेचकर प्राप्त रकम को ईडी की निगरानी में सुरक्षित म्यूचुअल फंड या सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकती हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी राशि ईडी के नियंत्रण में ही रहेगी और कंपनियां उसे निकाल नहीं सकेंगी।
CG High Court On Money Laundering Case बता दें कि ईडी ने वर्ष 2022 में महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा एप मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। जांच के दौरान एजेंसी को जानकारी मिली कि सट्टेबाजी से अर्जित कथित अवैध धन को कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर टिबरेवाल और सूरज चोखानी के माध्यम से विभिन्न कंपनियों में निवेश किया गया। ईडी के मुताबिक इस रकम का इस्तेमाल शेयर बाजार में निवेश के लिए किया गया था। इसके बाद 28 फरवरी 2024 को ईडी ने कार्रवाई करते हुए आठ कंपनियों के डीमैट और ट्रेडिंग खाते फ्रीज कर दिए थे। इन खातों में मौजूद शेयरों की कुल वैल्यू 29 फरवरी 2024 की स्थिति में करीब 423.60 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पीएमएलए कानून के तहत संपत्ति को फ्रीज या अटैच करने का उद्देश्य उसे सुरक्षित रखना होता है। केवल कागजी तौर पर अधिकार बनाए रखना पर्याप्त नहीं है। यदि शेयर बाजार में गिरावट के कारण संपत्ति की कीमत कम हो जाती है, तो फ्रीज करने का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में यदि कंपनियां केस जीतती हैं या सरकार संपत्ति जब्त करती है, दोनों ही स्थितियों में संपत्ति की वास्तविक वैल्यू सुरक्षित रहना जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि ईडी कोई निवेश प्रबंधन एजेंसी नहीं है, लेकिन संपत्ति का मूल्य बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।