CG Religious Freedom Bill: जबदस्ती धर्मांतरण पर कड़ी सजा.. इतने दिन पहले देनी होगी जानकारी, आखिर छत्तीसगढ़ में क्यों लाया गया धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, यहां जानिए डिटेल में A टू Z बातें
जबदस्ती धर्मांतरण पर कड़ी सजा.. इतने दिन पहले देनी होगी जानकारी, CG Religious Freedom Bill Kya Hai, Read Full News
रायपुरः CG Religious Freedom Bill: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया गया। प्रदेश के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस बिल को सदन के समक्ष रखा। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस देखने को मिली। इस पर विपक्ष ने आपत्ति जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया है। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के मामलों से जुड़े प्रकरण पहले से ही देश के 11 राज्यों में सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, ऐसे में राज्य विधानसभा में इस पर चर्चा उचित नहीं है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में राज्य के कई आदिवासी और ग्रामीण इलाकों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आईं कि लोगों को लालच, दबाव या धोखे के जरिए धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे सामाजिक असंतोष बढ़ा। पहले से मौजूद कानूनों में कई बार स्पष्टता या सख्ती की कमी महसूस की गई। विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से सख्त कानून की मांग की जा रही थी, जिसे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया।
क्या है धर्मांतरण विधेयक ? (CG Religious Freedom Bill Kya Hai )
CG Religious Freedom Bill: छत्तीसगढ़ में होने वाले धर्मांतरण पर रोक और धर्मातरण के दौरान होने वाले विवाद न बढ़े इसके लिए सरकार ने विधेयक तैयार किया है। इस ड्राफ्ट के अनुसार, किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में जाना आसान नहीं होगा। धर्म परिवर्तन केवल पूरी प्रक्रिया और नियम कानून का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर जेल के साथ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा
प्वाइंट्स में समझें क्या है छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026?
- प्रस्तावित कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा।
- यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
- विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।सोशल मीडिया के ज़रिए भी प्रलोभन दिया जाएगा उसे भी अपराध माना जाएगा
- कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
- सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।
- विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।
विपक्ष ने किया धर्म स्वतंत्रता बिल का विरोध (CG Religious Freedom Bill Kya Hai )
धर्म स्वतंत्रता बिल पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून देश के कई राज्यों में पहले से हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है, इसलिए इस बिल को जल्दबाजी में पास नहीं किया जाना चाहिए। महंत ने मांग की कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके। उन्होंने कहा कि इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं होना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन बढ़े। महंत ने संविधान और सहिष्णुता का हवाला देते हुए नेताओं और समाज सुधारकों के विचारों का जिक्र किया।
‘संविधान के तहत राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार’
वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के समय भी ऐसा कानून लागू किया गया था, इसलिए इसे गलत बताना ठीक नहीं है। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे राज्य इस तरह का कानून नहीं बना सकते। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार को है और यह बिल पूरी तैयारी और चर्चा के बाद लाया गया है। सदन की कार्यवाही चला रहे धर्मलाल कौशिक ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज कर दिया और बिल पेश करने की अनुमति दे दी।
विजय शर्मा बोले- भाग रहा विपक्ष
इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इस पर विजय शर्मा ने कहा कि यह वॉकआउट नहीं बल्कि भागना है। यह बिल पिछले हफ्ते ही राज्य कैबिनेट से मंजूर हुआ था। सरकार का कहना है कि इसमें 1968 के कानून को और मजबूत किया गया है और धर्मांतरण के नए तरीकों, जैसे डिजिटल और आर्थिक प्रलोभन, को भी शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में “छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968” लागू है, जिसे राज्य बनने के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था।
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