Iran Israel War News: मिडिल ईस्ट में जारी जंग को करीब 20 दिन हो चुके हैं और अब यह टकराव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआत में जहां हमले सैन्य ठिकानों और नेताओं पर केंद्रित थे, वहीं अब Iran Israel War News पर आ गया है। अलग अलग खबरों में आपने जरूर पढ़ा होगी कि, आज इस तेल रिफाइनरी में हमला हुआ।लेकिन अब, तेल और गैस के कुएं, रिफाइनरी और एलएनजी टर्मिनल अब “प्राइम टारगेट” बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति सीधे दुश्मन देश की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश है। पहले खर्ग द्वीप पर हमला हुआ और अब साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया गया, जिससे साफ है कि जंग अब आर्थिक मोर्चे पर लड़ी जा रही है।
Middle East War Energy Crisis: तेल-गैस बने मुख्य टारगेट
शुरुआती दिनों में ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों और बड़े नेताओं को निशाना बनाकर किया गया था। इसके बाद जंग का दायरा समुद्री रास्तों तक फैल गया, जहां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम जलमार्ग असुरक्षित हो गए। जहाजों पर हमले और टॉरपीडो अटैक जैसी घटनाओं ने वैश्विक व्यापार को भी प्रभावित किया। लेकिन अब हालात और गंभीर हो गए हैं, क्योंकि दोनों पक्ष सीधे ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, जिसका असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
Iran Israel conflict oil gas: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया, जो कतर के नॉर्थ डोम के साथ मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा गैस रिजर्व माना जाता है। यहां से ईरान की करीब 70 फीसदी गैस सप्लाई होती है। हमले के बाद यहां भीषण आग लग गई, जिसकी पुष्टि ईरानी मीडिया ने की। इससे पहले 7-8 मार्च की रात को तेहरान के तेल डिपो और करज क्षेत्र में भी भारी तबाही मचाई गई थी। खर्ग द्वीप पर हमला तो और भी बड़ा झटका था, क्योंकि यहां से ईरान का लगभग 90% कच्चा तेल निर्यात होता है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करता है, तो उसके ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा।
इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी कतर और खाड़ी देशों की ऊर्जा साइट्स पर हमले तेज कर दिए हैं। कतर के रास लाफान एलएनजी हब पर कई बार हमले किए गए, जहां आग लगने और प्लांट्स के प्रभावित होने की खबरें सामने आईं। इसके अलावा अबू धाबी की रुवैस रिफाइनरी और सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी भी निशाने पर रहीं। इन हमलों के कारण कई जगह उत्पादन प्रभावित हुआ और अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ा। लगातार बढ़ते इन हमलों से साफ है कि जंग अब सिर्फ सैन्य ताकत की नहीं रही, बल्कि ऊर्जा और अर्थव्यवस्था की जंग बन चुकी है, जिसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल सकता है।
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