शह मात The Big Debate: आखिर खत्म हुआ ‘सेस’.. लेकिन सियासत अब भी शेष!… सदन में पास हुआ जनता को राहत देने वाला विधीयर्क, शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का खेल

CG Budget Session 2026 News: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में कई मुद्दों, विधेयकों और संशोधनों पर मुहर लगी

शह मात The Big Debate: आखिर खत्म हुआ ‘सेस’.. लेकिन सियासत अब भी शेष!… सदन में पास हुआ जनता को राहत देने वाला विधीयर्क, शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का खेल

CG Budget Session 2026 News/Image Source: DD CG

Modified Date: March 20, 2026 / 11:54 pm IST
Published Date: March 20, 2026 11:54 pm IST
HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज अंतिम दिन था।
  • बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में कई मुद्दों, विधेयकों और संशोधनों पर मुहर लगी।
  • विधानसभा में उप कर संशोधन विधेयक 2026 जो कि सदन से पारित हो हुआ है।

CG Budget Session 2026 News: रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में कई मुद्दों, विधेयकों और संशोधनों पर मुहर लगी इन्हीं में शामिल है-

उप कर संशोधन विधेयक 2026 जो कि सदन से पारित हो चुका है। इस संशोधन विधेयक के पास होन से प्रदेश की 3 करोड़ जनता को मिलेगी रजिस्ट्री में बड़ी राहत मिली है। इसके तहत स्टांप शुल्क पर लगने वाला 12% उपकर खत्म कर दिया गया है। दावा है कि इससे प्रदेश की जनता को सालाना 150 करोड़ रुपए की राहत मिलेगी। (CG Budget Session 2026 News) पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, भूपेश सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं को पैसा देने राजीव गांधी युवा मितान क्लब खोले और उनके लिए फंड जुटाने सेस लगाया गया था।

सदन में विभागीय मंत्री के साथ-साथ बीजेपी के सीनियर विधायक चंद्राकर ने भी सेस पर सवाल उठाया कि, राजीव मितान क्लब को बिना पंजीयन, बिना ऑडिट सरकारी खजाने से 52 करोड़ रुपए कैसे दे दिए गए। चंद्राकर ने मांग की जांच कर, उन पैसों की वसूली उन्हीं अधिकारियों से की जाए। कांग्रेस नेता भी डिफेंसिव मोड में यही कहते नजर आए कि ढाई साल बीत गए हैं, सरकार पिछला छोड़ अपने मौजूदा कार्यों पर बात करे।

सियासी आरोप-प्रतिआरोप के बयानबाजी से इतर जनता को इससे बड़ी राहत मिली है। (CG Vidhan Sabha Budget Session 2026) प्रदेश में सेस के चलते 50 लाख की संपत्ति पर, 5% की स्टांप ड्यूटी के तौर पर ढाई लाख रुपए के साथ-साथ 12% के हिसाब से 30 हजार का सेस के तौर पर अतिरिक्त देना पड़ता था, जो अब बचेगा। सवाल ये है कि क्या सेस से मिली राशि को किसी भी जनहित के कार्य में उपयोग किया गया या बीजेपी के आरोप सही हैं, सही हैं तो क्या अब संबंधित अफसरों से उसकी भरपाई होगी?

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